गो सेवा के लिए सुदेवी दासी का नाम वर्ष 2019 के स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार के लिए घोषित किया गया है। यह सम्मान उन्हें 23 नवंबर को स्वामी ब्रह्मानंद समिति की ओर से गोशाला में ही दिया जाएगा। स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार भारत के पहले गेरुआ वस्त्रधारी सांसद और सन्यासी स्वामी ब्रह्मानंद के नाम पर पहली बार दिया जा रहा है।
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गोवंश के साथ सुदेवी दासी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
वह बीते 25 वर्ष से गो सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। सुदेवी दासी मूल रूप से जर्मन के बर्लिन शहर की रहने वाली हैं। इनका नाम फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग है। वर्तमान में ये भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ा स्थली श्रीधाम राधाकुंड में रह कर हजारों गायों की सेवा में लगी हैं। बीते वर्ष भारत सरकार की ओर से उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।
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'सुदेवी दासी' को राष्ट्रपति ने दिया पद्मश्री सम्मान (फाइल फोटो)
स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार भारत के पहले गेरुआ वस्त्रधारी सांसद और सन्यासी स्वामी ब्रह्मानंद के नाम पर दिया जा रहा है। इस साल उनकी 125वीं जयंती पर यह पुरस्कार गो सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाले भारतीय और गैर-भारतीय नागरिकों को प्रदान किया जाएगा। सुदेवी दासी को पहला स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार दिया जा रहा है। इसमें पुरस्कार के रूप में 10 हजार रुपये, कांस्य पदक, स्टेच्यू, सनद और अंग वस्त्र प्रदान किया जाएगा।
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गोवंश के साथ सुदेवी दासी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इस पुरस्कार का प्रायोजक लक्ष्य नाम का गैर सरकारी संगठन है। स्वामी ब्रह्मानंद समिति के चेयरमैन मनोहर लाल सिंह, प्रायोजक लक्ष्य संगठन कार्यकारिणी के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मपाल सिंह, आईआरएस अमरपाल सिंह, प्रस्तावक अमित राजपूत आदि उपस्थित थे।
जर्मन के बर्लिन शहर की रहने वाली फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग उर्फ सुदेवी दासी का इस साल के प्रारंभ में वीजा खत्म हो गया था। स्थिति उन्हें देश छोड़ने की उत्पन्न हो गई। इसकी सूचना सुदेवी दासी ने तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को दी थी। विदेश मंत्रालय से हुए हस्तक्षेप के बाद भारत में रहने की अवधि बढ़ा दी गई।