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मैनपुरी में हड़ताल ने ली नवजात की जान: मन्नतों के बाद जन्मा बेटा, एंबुलेंस न मिलने से मौत

Tue, 27 Jul 2021 12:06 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
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नवजात की मौत के बाद रोती मां - फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी में सोमवार को सरकारी एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल एक नवजात की जान पर भारी पड़ गई। सौ शैया अस्पताल से गंभीर हालत में हायर सेंटर के लिए रेफर नवजात के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाई, जिससे उसकी मौत हो गई। नवजात की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। मृतक के पिता ने बताया कि मन्नतों के बाद बेटे का जन्म हुआ था, लेकिन एंबुलेंस न मिलने से उसकी जान चली गई। 

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कुरावली थाना क्षेत्र के गांव लखौरा निवासी सुबोध कुमार की पत्नी शशीप्रभा को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार की शाम सौ शैया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, रात करीब 12 बजे शशीप्रभा ने बेटे को जन्म दिया। पैदा होने के बाद अचानक नवजात की हालत बिगड़ने लगी। सौ शैया अस्पताल से रात करीब 12:30 बजे नवजात को मेडिकल कॉलेज सैफई के लिए रेफर कर दिया गया। 
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एंबुलेंस का इंतजार करते नवजात के परिजन - फोटो : अमर उजाला
शशीप्रभा के पति सुबोध ने बताया कि उसने कई बार 102 और 108 एंबुलेंस सेवा के लिए कॉल किया, लेकिन उसका कॉल रिसीव नहीं हुआ। अस्पताल प्रशासन ने भी एंबुलेंस के लिए कोई मदद नहीं की। सोमवार की सुबह 11 बजे नवजात की मौत हो गई। 
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नहीं मिली सरकारी एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
सुबोध का कहना था कि उसे यदि एंबुलेंस समय पर मिल जाती तो बच्चे की जान बच सकती थी। सुबोध कुमार ओर शशीप्रभा के चार बेटियां हैं। शशी प्रभा ने पुत्र के लिए मन्नत मांगी थी, पुत्र के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल था। उसकी मौत से सारी खुशियां छिन गईं। 

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मैनपुरी के क्रिश्चियन मैदान में खड़ीं एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
सौ शैया अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके पचौरी ने कहा कि 102 और 108 एंबुलेंस सेवा मेरे अधीन में नहीं आती है। अस्पताल के पास खुद की कोई एंबुलेंस नहीं है। रेफर के बाद भी परिजन वाहन की व्यवस्था नहीं कर पाए। अस्पताल में नवजात को हर संभव उपचार दिया गया, लेकिन उसे नहीं बचाया जा सका। 
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नवजात की मौत के बाद रोती मां - फोटो : अमर उजाला
सीएमओ डॉ. पीपी सिंह ने कहा कि 102 और 108 और जीवन रक्षक एंबुलेंस सेवा के पायलट और ईएमटी अपनी मांगों को लेकर चक्का जाम किए हुए हैं। प्राइवेट एंबुलेंस चालकों ने सेवा में योगदान की बात कही है। यदि सरकारी नहीं मिल पा रही है तो निजी एंबुलेंस का सहयोग लिया जा सकता था। 
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