हॉकी के जादूगर दादा ध्यानचंद का जन्मदिन खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। आगरा के लिए खेल दिवस इसलिए और भी खास है क्योंकि ध्यानचंद के नाम पर पहला अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट ताजनगरी में ही शुरू हुआ था। दादा ध्यानचंद भी टूर्नामेंट में शामिल होते थे। टूर्नामेंट को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते। दूरदर्शन पर इसका सीधा प्रसारण किया जाता। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और अर्जुन अवार्डी जगबीर सिंह के पिता दर्शन सिंह ने टूर्नामेंट की शुरुआत कराई थी। आयोजन मंडल में शहर के गण्यमान्य लोगों को शामिल किया गया था। वर्ष 1970 से 1990 तक आयोजित किए गए हॉकी टूर्नामेंट में कई मौकों पर मेजर ध्यानचंद स्वयं शामिल हुए थे।
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आगरा कॉलेज मैदान में टूर्नामेंट के एक मैच के दौरान उमड़े दर्शक।
- फोटो : अमर उजाला
उस दौर में उत्तरी रेलवे, पश्चिमी रेलवे, इंडियन एयरलाइंस, कोर ऑफ सिग्नल, सिख रेजीमेंट मेरठ, इंडियन ब्लू, इंडियन व्हाइट, पंजाब पुलिस आदि टीमें प्रतिभाग करती थीं। हॉकी के दीवानों से स्टेडियम खचाखच भरा रहता था। उस दौर के हॉकी के नामीगिरामी खिलाड़ी बीपी गोविंदा, असलम शेर खां, बलवीर सिंह, एमपी गणेश, गुरबख्श, हरविंदर सिंह, उखवैन को देखने के लिए लोग दूर-दराज के इलाकों से पहुंचते थे। टूर्नामेंट की शुरुआत आगरा कॉलेज और सेंट जोंस कॉलेज मैदान से हुई थी। बाद में टूर्नामेंट के मैच स्टेडियम में भी खेले गए।
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अखिल भारतीय ध्यानचंद हॉकी टूर्नामेंट के दौरान आगरा आए मेजर ध्यानचंद, साथ में हैं (बाएं) टूर्नामेंट की आयोजन समिति के अध्यक्ष स्वर्गीय दर्शन सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
दूरदर्शन पर होता था टूर्नामेंट का सीधा प्रसारण
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान जगबीर सिंह का कहना है कि भारत का यह पहला हॉकी टूर्नामेंट था, जिसमें नकद धनराशि पुरुस्कार के रूप में विजेता और उपविजेता टीम को दी जाती थी। टूर्नामेंट का दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण किया जाता था।
सिथेंटिक टर्फ से मिली हॉकी को ऑक्सीजन
एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में युवा हॉकी खिलाड़ी सिंथेटिक टर्फ पर प्रेक्टिस कर रहे हैं। सन 2018 में सिंथेटिक टर्फ की सौगात शहर के हॉकी खिलाड़ियों को मिली। हॉकी आगरा के अध्यक्ष राजीव सोई का कहना है कि हॉकी को बढ़ावे देने के लिए कोशिशें लगातार जारी हैं। इसका अच्छा परिणाम यह देखने को मिला है कि वर्ष 2018 से 2020 तक स्टेडियम में पंजीकृत हॉकी खिलाड़ियों की संख्या बीस प्रतिशत तक बढ़ी है।
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स्टेडियम में आयोजित ध्यानचंद हॉकी टूर्नामेंट के दौरान मेजर ध्यानचंद से बात करता एक प्रशंसक।
- फोटो : अमर उजाला
पांच साल में तेजी से खुले प्राइवेट कोर्ट और मैदान
खेलों के प्रति बढ़ रहे रुझान के कारण शहर में प्राइवेट मैदान, जिम, शूटिंग रेंज, बैडमिंटन कोर्ट बड़ी संख्या में खुले हैं। शहर के खिलाड़ियों का जज्बा यह है कि कोरोना काल में प्रेक्टिस के लिए कुछ खिलाड़ियों ने घरों में ही शूटिंग रैंज और कॉलोनी में अस्थायी कोर्ट बना लिए। पहले खिलाड़ियों को जहां प्रेक्टिस के लिए स्टेडियम पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब बड़ी संख्या में खिलाड़ी प्राइवेट मैदानों में जाकर खेलों में अपना करियर बना रहे हैं। पिछले पांच सालों में आगरा में क्त्रिस्केट के सात मैदानों के अलावा छह बैडमिंटन कोर्ट, तीन टेबिल टेनिस सेंटर, चार शूटिंग रेंज खुल चुकी हैं। शहर के हर एक एक किलोमीटर में सभी सुविधाओं से युक्त जिम भी दिखने लगे हैं।
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अर्जुन अवार्डी की तस्वीरें
- फोटो : अमर उजाला
48 साल में शहर को मिले पांच अर्जुन अवार्ड
मैदान में पूरे-पूरे दिन पसीना बहाने वाले ताजनगरी के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहर को एक नई पहचान दी है। पिछले 48 सालों में एथलेटिक्स, हॉकी और क्त्रिस्केट में शहर को पांच अर्जुन अवार्डी मिले चुके हैं। दो एथलीट, दो क्त्रिस्केटर और एक हॉकी खिलाड़ी को यह सम्मान प्राप्त हुआ है।
. सन 1972: एथलेटिक्स में विजय सिंह चौहान को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया।
. सन 1990: हॉकी इंडिया के पूर्व कप्तान जगबीर सिंह को अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया।
. सन 1996: एथलीट अजीत भदौरिया को मिले अर्जुन अवार्ड ने शहर की शान बढ़ाई।
. सन 2019: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य पूनम यादव को अर्जुन अवार्ड मिला।
. सन 2020: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य दीप्ती शर्मा अर्जुन अवार्ड से सम्मानित हुईं।
राहुल पालीवाल, सचिव, जिला ओलंपिक संघ
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खेलों की ओर बढ़ रहा रुझान
खेलों में मिलने वाली शोहरत और धन को देखते हुए खिलाड़ी खेल को करियर बना रहे हैं। सरकारी सिस्टम में पूरी सुविधाएं नहीं मिलने के कारण नन्हे खिलाड़ी प्राइवेट कोचिंग सेंटर की ओर रुख कर रहे हैं। - राहुल पालीवाल, सचिव, जिला ओलंपिक संघ