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Mulayam Singh Yadav: कुनबे की दरार ने मुलायम को कर दिया था कमजोर, सियासत की जमीन पर यूं बिखरा परिवार

Mon, 10 Oct 2022 02:09 PM IST
धीरेन्द्र सिंह दीपक जैन, आगरा
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मुलायम सिंह यादव, शिवपाल सिंह, अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी और फिरोजाबाद सपा संरक्षक मुलायम सिंह के सबसे मजबूत गढ़ रहे हैं। इन दोनों जिलों में मुलायम की तमाम रिश्तेदारियां हैं। यहां के लोगों की नजदीकी और मुलायम से सीधे जुड़ाव के कारण ही भाजपा की लहर में भी धरती पुत्र का जलवा कायम रहा। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव से सैफई कुनबे में जब दरार पड़ी तब मुलायम के मजबूत गढ़ भी हिलने लगे। इसका असर सपा के मजबूत गढ़ फिरोजाबाद जिले में साफ दिखाई दिया। 

सैफई का कुनबा जब बिखरा तब उसका सीधा असर मुलायम के गढ़ पर भी पड़ा। 2019 के लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद सीट से मुलायम के भतीजे अक्षय यादव चुनाव इस कारण हार गए क्योंकि उनको चुनौती किसी और से नहीं मुलायम के भाई शिवपाल यादव से मिली थी। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन कर शिवपाल यहां से पहला लोकसभा चुनाव लड़े थे। खुद तो न जीत सके भतीजे अक्षय को जरूर हरा दिया। मैनपुरी से खुद मुलायम मैदान में थे, लिहाजा भाजपा की लहर में भी 2019 में सपा का दुर्ग बचा रहा। जबकि अक्षय के लिए मुलायम वोट मांगने फिरोजाबाद आए थे। 
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मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

एकजुट थे तब तक कोई लहर हिला न सकी सपा का दुर्ग 

सैफई परिवार जब तक एकजुट रहा किसी भी दल की लहर सपा के दुर्ग हिला नहीं सकी। 2014 का लोकसभा चुनाव था। पूरे देश में मोदी लहर चल रही थी। तब समाजवादी पार्टी अपने गढ़ मोदी की आंधी से बचाने के लिए एडीचोटी का जोर लगाए थी। फिरोजाबाद सीट से सपा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव चुनाव लड़ रहे थे तो मैनपुरी से खुद मुलायम उम्मीदवार थे। मोदी ने फिरोजाबाद में चुनावी सभा कर भाजपा प्रत्याशी के लिए वोट मांगे थे। मोदी की सुनामी में भी मुलायम मैनपुरी के साथ-साथ फिरोजाबाद की सीट जीता ले गए थे। यादवों का ठोस वोट बैंक, मुस्लिम वोट और दीगर जातियों के साथ वोट मुलायम से यहां के लोगों की नजदीकी का ही असर था कि भाजपा मुलायम के किले को ढहा नहीं सकी। मैनपुरी से मुलायम ने इस्तीफा देकर तेज प्रताप को उप चुनाव लड़ाया तब देश में भाजपा राज आ चुका था। इसके बाद भी मुलायम तेज प्रताप को जिता ले गए थे।
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मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

यहां नाता सियासी नहीं रिश्तेदारियों का है

मुलायम सिंह यादव का फिरोजाबाद जिले से गहरा नाता था। यह नाता सिर्फ राजनीतिक नहीं रिश्तेदारियों से जुड़ा था। मुलायम के कई रिश्तेदार इस जिले में हैं। सैकड़ों लोग ऐसे हैं जिनका सीधा नाता सैफई परिवार से है।मुलायम के भाई शिवपाल यादव की ससुराल सिरसागंज के नगला हिमायूं है, जबकि उसके भाई राजपाल यादव की ससुराल राजा का ताल में है। मुलायम के भतीजे पूर्व सांसद धमेंद्र यादव की एक बहन पूर्व जिला पंचायत सदस्य बबूल यादव और दूसरी बहन शिकोहाबाद निवासी इंजीनियर राजीव यादव को ब्याही हैं। सिरसागंज के पूर्व विधायक हरिओम यादव की भतीजी मृदुला यादव का विवाह मुलायम के सबसे बड़े भाई रतन सिंह के पुत्र रणवीर यादव के साथ हुआ था। रणवीर यादव की स्मृति में ही सैफई महोत्सव आयोजित किया जाता है। मृदुला के पुत्र मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के दमाद बने।

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मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

शिकोहाबाद से जीते बने यूपी को मुख्यमंत्री

मुलायम सिंह यादव 1993 का विधानसभा चुनाव एटा जिले की निधौली कलां और इटावा की जसवंत नगर सीटे के साथ फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद सीट से भी लड़े थे। तीनों जगह से जीते थे। शिकोहाबाद में वह 55 हजार से अधिक मतों से जीते थे और यूपी के मुख्यमंत्री बने थे।
 
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मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

जसराना ने सबसे अधिक वोटों से जिताया, बने रक्षा मंत्री

1996 के लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र में शामिल थी। तब मुलायम मैनपुरी से लोकसभा चुनाव लडे़ थे। तब मुलायम ने कहा था...देखते हैं जसराना विधानसभा हमें कितने वोटों से जिताएगी। जसराना विधानसभा ने सबसे अधिक वोटों से उन्हे जिताया था। तब केंद्र सरकार में वह देश के रक्षामंत्री बने थे। 
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