हिंदू धर्म के सनातन धर्मावलंबियों की आस्था से खिलवाड़ करने के लिए सन् 1773 में मुगल शासकों ने बरसाना के लाडली जी मंदिर पर कब्जा कर लिया था। उस समय बरसाना भरतपुर रजवाड़े के राजा सूरजमल के पौत्र के अधीन था। मुगल शासक का भरतपुर नरेश सूरजमल के पौत्र की सेना से युद्ध हुआ। भरतपुर रजवाड़े की सेना पीछे हट गई। उस समय युद्ध के हालातों को देखते हुए मंदिर के गोस्वामी राधारानी के श्रीविग्रह को श्योपुर ले गए। आठ माह तक श्योपुर में राधारानी के श्रीविग्रह की पूजा-अर्चना की गई। राधारानी मंदिर के रिसीवर डॉ. कृष्णमुरारी गोस्वामी ने बताया कि 1773 में भरतपुर रजवाड़े पर मुगल बादशाह शाह आलम ने अपने सेनापति नजफ खान को भेज कर कब्जा करने का प्रयास किया था।