आगरा के गांव लखनपुर ने अपने लाल देवेंद्र सिंह बघेल को अंतिम विदाई नम आंखों से दी। शहीद की अंतिम यात्रा में हर किसी की आंखों से आंसुओं की धारा बहती दिखी। गांव की बेटियों ने नारे लगाए, देश का सैनिक कैसा हो, देवेंद्र भइया जैसा हो। बीएसएफ की गारद ने देवेंद्र को सैनिक सम्मान केसाथ सलामी देकर विदा किया।
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तस्वीरें: लखनपुर ने शहीद को नम आंखों से दी अंतिम विदाई, गूंजे हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे
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शहीद को नम आंखों से दी अंतिम विदाई
- फोटो : अमर उजाला
सात हजार आबादी वाले गांव में बुधवार को एक भी घर में चूल्हा नहीं जला। देवेंद्र की शहादत की खबर आने से पहले किसी ने कुछ खा लिया सो खा लिया। इसके बाद अन्न का एक दाना नहीं गया मुंह में। गांव की दुकानें नहीं खुलीं।
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हीद को नम आंखों से दी अंतिम विदाई
- फोटो : अमर उजाला
सुबह से ही पूरा गांव देवेंद्र के घर इकट्ठा हो गया था। शहीद के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार हो रहा था। जैसे ही बीएसएफ की टुकड़ी पार्थिव शरीर लेकर पहुंची, वैसे ही देवेंद्र की पत्नी पिंकी और मां रामवती का हाल बेहाल हो गया।
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शहीद को नम आंखों से दी अंतिम विदाई
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शहीद देवेंद्र सिंह के दो बच्चे थे, दो साल का धीरज और आठ माह की रितिका। बेटे धीरज का दूसरा जन्मदिन 25 मई को है। पिता देवेंद्र 20 मई को आने वाले थे। देवेंद्र का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाने लगा। रास्ते भर नारे ये नारे गूंजते रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा, देवेंद्र तेरा नाम रहेगा।
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शहीद को नम आंखों से दी अंतिम विदाई
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थोड़ी ही देर में पार्थिव शरीर को उस जमीन पर रख दिया गया जहां शहीद के परिजन अंत्येष्टि करना चाह रहे थे। यह एडीए की जमीन है। प्रशासन इस पर अनुमति देने के लिए तैयार नहीं था। हालांकि बाद में यहां शहीद को अंमिम संस्कार किया गया।
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शहीद देवेंद्र के पार्थिव शरीर के साथ आए बीएसएफ के अधिकारियों ने उसकी शौर्यगाथा सुनाई तो हर कोई रोमांचित हो उठा। बनवारी लाल ने बताया कि देवेंद्र पर पल चौकस रहता था।
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उन्होंने बताया कि बीएसएफ जवान देवेंद्र वो बहुत बहादुर था, गोलियों के बीच भी पूरे धैर्य के साथ अपना मोर्चा संभालेरहता था। दुश्मन की गोली का जवाब गोली से देता था। बता दें कि कश्मीर में 14 मई को रात पाकिस्तान की फायरिंग में बीएसएफ जवान देवेंद्र सिंह बघेल शहीद हो गए थे।