जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए आगरा के वीर सपूत देवेंद्र सिंह बघेल को मरणोपरांत राष्ट्रपति पुरस्कार पुलिस मेडल फोर गैलेंट्री के लिए चयनित किया गया है। गणतंत्र दिवस के मौके पर इसकी घोषणा की गई। वो 15 मई 2018 को शहीद हुए थे। उन्होंने अपनी बहादुरी से आतंकियों की घुसपैठ नाकाम कर दी थी।
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शहीद देवेंद्र सिंह का बेटा
गांव लखनपुर के देवेंद्र सिंह बघेल बीएसएफ में थे। जम्मू कश्मीर के कठुआ सेक्टर में बार्डर पर शहीद हुए थे। पाकिस्तान से तरफ से घुसपैठ कराए जाने की तैयारी थी। इसके लिए पाकिस्तानी सेना कवर फायर दे रही थी। लखनपुर का लाल दुश्मन के नापाक इरादों को भांप गया। उन्होंने गोली का जवाब गोली से दिया।
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शहीद को नम आंखों से दी अंतिम विदाई (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
दोनों ओर से गोलियां चल रही थीं। देवेंद्र सिंह मोर्चे पर डटे थे। तभी एक गोली आकर उनकी आंख में लगी। खून बहने लगा लेकिन देवेंद्र सिंह ने न हिम्मत छोड़ी न मोर्चा। वो लहूलुहान हालत में भी गोलियां बरसाते रहे और आतंकियों के नापाक मंसूबे नाकाम कर दिए थे।
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शहीद की पत्नी ने कनिष्ठ लिपिक के पद पर किया ज्वाइन
- फोटो : अमर उजाला
शहादत को सम्मान मिलने के एलान से शहीद का परिवार भावुक हो गया। शहीद की पत्नी पिंकी ने बताया कि उनके लिए यह गर्व के पल हैं। वो इसे बयां नहीं कर सकती हैं। वहीं गांव के लोगों को भी अपने बहादुर लाल पर नाज है। देवेंद्र सिंह की बहादुरी के किस्से हर किसी की जुबां पर हैं।
देवेंद्र सिंह बघेल की शहादत के बाद उनकी पत्नी पिंकी को लंबे संघर्ष के बाद नौकरी मिली है। वो कलक्ट्रेट में कनिष्ठ लिपिक के पद पर हैं। शहीद के दो बच्चे हैं। बेटा धीरज तीन साल का है, जबकि बेटी ऋतिका दो साल की है।