पिता का पिंडदान करते ही बेटा मां ( नीलम भाटिया) को रामलाल वृद्धाश्रम में छोड़ गया। उसने पिता
(मुकेश भाटिया) को भी यहीं पर रखा था। विगत 15 मई को मृत्यु के बाद दाह संस्कार के लिए बेटा आया था और मां को अपने साथ ले गया था। मगर, जैसे ही पिता का पिंडदान हुआ, वैसे ही मां को फिर से वृद्धाश्रम छोड़ गया। मां ने बताया कि उसने बेटे को समझने में एक बार फिर से भूल कर दी।
दिल्ली के रहने वाले दंपती दिसंबर 2018 से वृद्धाश्रम में रह रहे थे। बेटे द्वारा धोखे से सारी प्रॉपर्टी अपने नाम कराने के बाद मां बाप को घर से बाहर निकाल दिया। उसके बाद बुजुर्ग पति-पत्नी को रामलाल वृद्धाश्रम ने आश्रय दिया। पति मुकेश भाटिया ने प्रबंधन पर दर्जनभर किताबें लिखीं। मुकेश भाटिया अपनी पत्नी नीलम भाटिया के साथ आश्रम में रह रहे थे। नीलम भाटिया का कहना था कि पति यह सह नहीं पा रहे थे जिसके चलते उनकी 15 मई को मौत हो गई।
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मुकेश भाटिया (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
नीलम भाटिया का कहना है कि उन्हें लगा कि अब तो बेटे को अपनी गलती पर पछतावा होगा कि जिस वजह से उसके पिता की मौत हुई है तो वह मुझे अब अपने घर में अच्छे से रखेगा। लेकिन अब क्या कर सकती हूं , अब तो बस मुझे भी मौत का ही इंतजार है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : demo
मुकेश भाटिया ने प्रबंधन पर 12 किताबें लिखी थीं और 20 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए थे। मुकेश भाटिया ने दुबई में भी प्रबंधन का ज्ञान बांटा था। दिल्ली के मुकेश भाटिया को पत्नी नीलम भाटिया के साथ बेटे ने घर से निकाल दिया। उनकी पत्नी नीलम भी एमबीए हैं।
नीलम भाटिया के मुताबिक बेटे ने धोखे से सारी जायदाद अपने नाम करा ली। इसके बाद उसका और बहू का व्यवहार इतना खराब हो गया कि वहां एक पल भी रहना मुश्किल था। नीलम कहती हैं, मैंने तो किसी तरह इसे किस्मत का लिखा मानकर खुद को संभाल लिया है, लेकिन ये (मुकेश ) सच को स्वीकार नहीं कर पाए।