फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फतेहपुरसीकरीः दरगाह में हुए बवाल के बाद लपके नहीं पकड़ सकी पुलिस, तस्वीरें आईं सामने

Thu, 30 May 2019 09:43 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 5
दरगाह में हुए बवाल के दौरान पुलिसकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
फतेहपुर सीकरी बुलंद दरवाजा परिसर स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में बुधवार शाम पुलिस पर हुए हमले के मामले में गुरुवार रात तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई। हमले का आरोप लपकों पर है और पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इसमें छह लोग नामजद हैं जबकि 150 अज्ञात में हैं।
विज्ञापन

2 of 5
बवाल के दौरान पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
हमले के सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के पास मौजूद हैं। बावजूद इसके सिर्फ छह आरोपियों की पहचान होने से पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। क्या पुलिस स्थानीय लपकों को भी पहचानती नहीं है? पुलिस पर यह हमला एक लपके को हिरासत में लिए जाने के बाद हुआ था। लपकों ने पुलिस पर पथराव किया था, तेजाब की बोतलें भी फेंकी थी। पथराव में दरोगा चंद्रपाल सिंह और सिपाही अनुज कुमार घायल हो गए थे।
विज्ञापन

3 of 5
दरगाह में हुई फायरिंग के बाद पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
कस्बा इंचार्ज अमित कुमार ऊपर पहाड़ निवासी चांद मोहम्मद, जाहिद कुरैशी, शाहिद, फूल चादर बेचने वाले रवि कुरैशी, सेटू को नामजद किया गया है जबकि 150 लोग अज्ञात में हैं। पुलिस ने बलवा, जानलेवा हमला की धाराएं लगाई हैं। मौके से गिरफ्तार सेटू लपके को जेल भेजा दिया गया है। पुलिस का कहना है कि नामजद आरोपियों के घर दबिश दी गई। वे फरार हो गए हैं। अज्ञात आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही एफआईआर में उनके नाम खोल दिए जाएंगे।

4 of 5
fatehpur sikri
बवाल के बाद दरगाह परिसर में दूसरे दिन भी सन्नाटा सा पसरा रहा। एफआईआर दर्ज होने की जानकारी से दरगाह परिसर में लपके, हॉकर और फूल चादर बेचने वाले भी नहीं दखे। ऐतिहासिक इमारत में गुरुवार को सिर्फ देशी विदेशी पर्यटक ही घूमते नजर आए। हालांकि बवाल के बाद दरगाह परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिनभर पुलिस तैनात रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
fatehpur sikri
यह पहला मौका नहीं है जब पुलिस पर हमला करने के बाद लपके नजर नहीं आए हों। इससे पहले भी लपकों ने यही किया है। जब पुलिस पर गिरफ्तारी का दबाव बनता है, तब लपके कुछ दिन के लिए आस पास रिश्तेदारी में चले जाते हैं। जैसे ही मामला शांत होता है, लपके फिर से सक्रिय हो जाते हैं। पुलिस भी चार दिन ही सख्ती दिखाती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें