आगरा में पैदल आने और यहां से जाने वालों का सिलसिला जारी है। लॉकडाउन में इन लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन वाहनों की व्यवस्थाएं करने में जुटा हुआ है, लेकिन इतनी भीड़ है कि रोडवेज बसें भी नाकाफी हैं। ऐसे में प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए सेना आगे आई है। उधर, प्रशासन ने स्कूल बसों को लगाया है।
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आगरा आईएसबीटी पर भीड़
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में शनिवार को फंसे हुए लोगों को घर पहुंचाने के लिए रोडवेज की 375 बसें चलाईं गई थीं, लेकिन यात्री लेकर सिर्फ 75 बसें ही गईं। शहर के आईएसबीटी, ईदगाह और आगरा फोर्ट बस अड्डे पर रातभर लोगों की भीड़ रही। रविवार सुबह भी घर जाने वालों की संख्या कम नहीं हुई है।
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स्कूल बस
- फोटो : अमर उजाला
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह व एसएसपी बबलू कुमार ने शहर में पैदल आए बाहरी मुसाफिरों को उनके राज्य की सीमा तक भेजने का इंतजाम किया। लोगों को ले जाने के लिए स्कूल बसों को लगाया गया है। आईएसबीटी, ईदगाह और आगरा फोर्ट बस अड्डे पर लोगों को लेकर स्कूल वाहन रवाना हुए।
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सेना के वाहन
- फोटो : अमर उजाला
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि बार्डर अधिकारियों को सूचित किया जा रहा है यहां से कितने लोग भेजे जा रहे हैं। दिल्ली, फरीदाबाद, पलवल, राजस्थान से आए मुसाफिरों को उनकी सीमा तक पहुंचने के लिए सेना के 10 ट्रक लगाए गए हैं।
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टैंकर की छत पर बैठे लोग
- फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में मुसीबत का बोझ लेकर पैदल आए लोगों की अपनी-अपनी मजबूरी है। हर कोई अपने घर पहुंचना चाहता है। कई लोग तो जान जोखिम में डालकर घर जा रहे हैं। जिन लोगों को जगह नहीं मिली, वो वाहनों की छतों पर बैठ गए। आगरा से पेट्रोलियम के टैंकर की छत पर भी बैठकर लोग गए।
लॉकडाउन में कारखाने बंद हो गए। आटा-दाल मिल नहीं रहा था, रोटी के लाले थे, इसलिए घर जाना मजबूरी हो गया। बस मिली नहीं, ट्रक चल नहीं रहे थे, इसलिए हजारों लोग पैदल ही निकल पड़े थे। सिर पर सामान और मन में किसी भी तरह घर पहुंचने का लक्ष्य। कोई अयोध्या से चला तो कोई दिल्ली से, 100 से 200 किमी तक पैदल चलना पड़ा है, पांव में छाले पड़े गए, मगर सफर जारी है।