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कारगिल विजय दिवस: बाह के 400 रणबांकुरों ने पाक को घुटने टेकने पर कर दिया था मजबूर

Fri, 26 Jul 2019 06:20 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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शहीद निर्वेश के स्मारक पर माता पिता व अन्य परिजन - फोटो : अमर उजाला
कारगिल विजय दिवस याद आते ही बाह के यमुना-चंबल पट्टी के हर युवा का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। ये वही दिन है जब बाह के 400 रणबांकुरों ने सीमा पर अपनी बहादुरी से पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। पहले विश्व युद्ध से लेकर अब तक लड़ी गई हर जंग की यादों को समेटे बाह के रुदमुली गांव के शहीद स्मारक पर विजय दिवस का जश्न मनाया गया था।
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रुदमुली में शहीद स्मारक - फोटो : अमर उजाला
कारगिल जंग में खंडेर के जितेंद्र सिंह, कोरथ के लायक सिंह के बलिदान के अलावा बाह के 400 रणबांकुरों ने पाक को उसकी साजिश की सजा दी थी। कारगिल जंग ही क्यों यहां के वीर सपूतों ने देश की हर लड़ाई में अपनी बहादुरी की अमिट छाप छोड़ी है। रूदमुली के 6, कोरथ के 7, जवानों के अलावा उमरैठा, बासौनी, नावली, क्वारी, चांगौली आदि गांवों के 400 सपूतों ने कारगिल जंग में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया था। 
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शहीद रामवीर सिंह का स्मारक - फोटो : अमर उजाला
रूदमुली के कैप्टन निहाल सिंह, कोरथ के कैप्टन रमाशंकर सिंह, क्वारी के जितेंद्र सिंह भदौरिया ने कारगिल जंग के विजय दिवस की पूर्व बेला पर इस गौरव गाथा को याद करते हुए सीमा पर सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक पर सराहना की। रुदमुली गांव का शहीद स्मारक हर जंग की गौरव गाथा को अपने आंचल में समेटे है। 

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कारगिल शहीद श्यामवीर सिंह की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
पहले विश्व युद्ध में 82 सपूतों ने भाग लिया। 6 शहीद हुए। दूसरे विश्व युद्ध में 90 जवान शामिल हुए, 4 शहीद हुए। 1947-48 के कश्मीर युद्ध में 52 लोग शामिल हुए, जिनमें से दो शहीद हो गए थे। 1962 में रघुवीर सिंह, 1965 में बृजराज सिंह, 1971 में जसकरन सिंह शहीद हुए। इस गांव के युवा सेना में जाना ही पसंद करते हैं। शहीद स्मारक के पास ही लोग सैनिक ट्रेनिंग सेंटर खोले जाने की लंबे अर्से से मांग कर रहे हैं।      
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कारगिल शहीद लायक सिंह की पूजा करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
देश के वायुसेना उपप्रमुख आरके सिंह भदौरिया के गांव कोरथ की देशभक्ति आस्था से जुड़ी हुई है। जी हां, यहां के कारगिल शहीद नायब सूबेदार लायक सिंह को गांव के लोग देवता की तरह से पूजते हैं। राष्ट्रीय पर्व हो या कोई तीज त्योहार, गांव के लोग शहीद स्मारक पर जुटते हैं, प्रसाद ग्रहण करते है।
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