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तस्वीरें पुष्प-शाक प्रदर्शनी: लैब इंचार्ज की नौकरी छोड़कर कर रहे थाई एप्पल बेर की खेती

Sun, 16 Feb 2020 02:45 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

4150 तरह के फूल, फल और सब्जी की स्टॉल लगी और 1140 किसानों ने भाग लिया।  
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जल ही जीवन का संदेश देती प्रदर्शनी में लगी एक स्टॉल - फोटो : अमर उजाला
छह किलो की शलजम, पांच किलो की गोभी। लाल रंग की मूली और अमरूद के आकार का बेर। सर्किट हाउस में लगी उद्यान विभाग की मंडलीय पुष्प-शाक प्रदर्शनी में उन्नत फसलों की स्टॉल लगी। इसमें 4150 तरह के फूल, फल और सब्जी की स्टॉल लगी और 1140 किसानों ने भाग लिया।  
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डीएम प्रभुनारायण सिंह और एसएसपी बबलू कुमार ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया - फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनी में अजवाइन, ब्रह्मी, चंदन, अखरोट, सर्पगंधा, थाई एप्पल बेर, मशरूम, टमाटर, मिर्च, बैंगन, शिमला मिर्च, गेंदा, गुलाब, गुलमोहर, डहेलिया, चाइनीज संतरा समेत अन्य की खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया। इससे पहले डीएम प्रभुनारायण सिंह और एसएसपी बबलू कुमार ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। 
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पुष्प देखते जिलाधिकारी - फोटो : अमर उजाला
निर्णायकों ने सर्वोत्तम पुष्प गमला समूह सिनरेरिया में राजकीय उद्यान आगरा, पुष्प डहेलिया-फोलियेज गमला समूह में भारती पुरातत्व उद्यान शाखा को पुरस्कार मिला। उत्कृष्ट गमलों में होटल ट्राईडेंट, एवं होटल जेपी पैलेस का प्रदर्शन सराहनीय रहा। अधीक्षक उद्यान विभाग डॉ. एसके वर्मा, उप निदेशक उद्यान कौशल कुमार नीरज और जिला उद्यान अधिकारी अनीता सिंह ने सभी का आभार जताया। 
 

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लाल रंग की मूली - फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनी में संगोष्ठी कर मधुमक्खी-मछली पालन के अलावा ऐलोवेरा, तुलसी, लेमन घास समेत अन्य की खेती के बारे में भी किसानों को बताया। इसमें लागत से डेढ़ से दो गुना मुनाफे के बारे में बताया। किसानों को सिंचाई, जैविक खेती, मिट्टी की जांच, गोबर-हरी खाद के बारे में वैज्ञानिक ढंग से बताया।
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प्रदर्शनी में फूलों की गुड़िया तैयार करतीं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनी में फूलों से हाथी, घोड़ा, फाइटर प्लेन, विशाल गुलदस्ता, ताजमहल बनाए। इनको निहारने के साथ ही सेल्फी लेने की दर्शकों में खूब होड़ रही। बच्चों के मनोरंजन के लिए यहां झूले भी लगाए, जिन पर बच्चों ने खूब मस्ती की। 
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देवीदयाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
फिरोजाबाद के बायोटेक इंजीनियर देवीदयाल सिंह फरीदाबाद में लैब इंचार्ज की नौकरी छोड़कर थाई एप्पल बेर की खेती कर रहे हैं। पांच साल पहले सालाना चार लाख का पैकेज था। पांच बीघा में इसकी पौध लगाई, प्रति बीघा में 80 पौधे रोपे। प्रति पौधे पर 40-50 किलो बेर आता है और प्रति पौधे एक से 1500 रुपये बच रहे हैं। इसका पौधा पांच से छह महीने में फल देने लगता है। अब वह ड्रेगन फ्रूट, अमरूद, की भी खेती कर रहे हें। उन्होंने बताया कि परंपरागत तरीके के बजाय वैज्ञानिक ढंग से खेती करने से ज्यादा मुनाफा है। 
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ड्रेगन फ्रूट - फोटो : अमर उजाला
नारंगी के किसान शीलन सिंह शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले वह आलू की खेती करते थे, लेकिन उसमें कई सालों से नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में उन्होंने शिमला मिर्च की खेती करने का मन बनाया। कृषि विशेषज्ञों से इसकी जानकारी की और जैविक तरीके से खेत तैयार किए। इसमें शिमला मिर्च की बुवाई की। प्रति एकड़ डेढ़ से दो लाख रुपये बच रहे हैं। जैविक खेती से तैयार की गई शिमला मिर्च की होटल-रेस्टोरेंट और बाजार में मांग भी बहुत है।
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