मथुरा के राधाकुंड में राधारानी की ननिहाल गांव मुखराई से शुरू हुआ चरकुला नृत्य अब ब्रज की होली का हिस्सा बन चुका है। ब्रज में जहां भी होली महोत्सव का आयोजन होता है, वहां चरकुला नृत्य का आयोजन देखने को मिलता है। चाहे मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि की होली हो या बरसाना की लठामार होली। चरकुला नृत्य के बिना होली का कार्यक्रम अधूरा सा दिखाई देता है।
होली के दूसरे दिन गांव मुखराई में ग्रामीण महिलाओं द्वारा 108 जलते दीपकों के साथ चरकुला नृत्य की परंपरा होती है। इस बार भी चरकुला नृत्य को लेकर महिलाएं तैयारियों में जुट गई हैं। इस अनूठी परंपरा का ब्रज की माटी से ही नहीं सात समुद्र पार तक आकर्षण बना हुआ है। ब्रज के कलाकारों द्वारा थाईलैंड, रूस, लंदन, इटली, इंडोनेशिया, श्रीलंका आदि देशों में चरकुला नृत्य का आयोजन किया जा चुका है।