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होली विशेष: राधा-कृष्ण के गांवों के बीच नहीं होता शादी का रिश्ता, 5000 साल पुरानी है अनूठी परंपरा

Fri, 19 Mar 2021 12:03 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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बरसाना और नंदगांव - फोटो : Amar Ujala
ब्रज का कण-कण राधा-कृष्ण के पावन प्रेम का साक्षी है। यहां की परंपराएं अनूठी हैं, जो राधा-कृष्ण के पावन रिश्ते को आज भी संजोए हुए हैं। ऐसी ही एक परंपरा राधारानी के गांव बरसाना और श्रीकृष्ण के नंदगांव के बीच 5000 वर्षों से चली जा रही है। कहा जाता है कि इन दोनों गांवों के बीच अब तक कोई वैवाहिक संबंध नहीं हुआ है, जबकि यहां के लोग ससुराल का रिश्ता निभाते हैं और एक-दूसरे का आदर-सम्मान करते हैं। इस अनूठी परंपरा के पीछे राधा-कृष्ण का पावन प्रेम है। 
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बरसाना स्थित राधारानी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कहते हैं संबंध निभाना एक कला है और इस कला में नंदगांव-बरसाना के लोगों ने अनोखी मिसाल दुनिया के सामने पेश कर रखी है। संबंध निभाना सीखना है तो नंदगांव-बरसाना वालों से सीख लें। इनके रिश्तों में कोई स्वार्थ नहीं है, कोई दिखावा नहीं है। है तो सिर्फ राधाकृष्ण का अमर प्रेम। बरसाना और नंदगांव दो अलग-अलग स्थान होते हुए भी एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों गांवों के बीच रिश्ता ससुराल का है, लेकिन आज तक कोई वैवाहिक संबंध नहीं हुए। 
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राधाकृष्ण के स्वरूपों पर पुष्पवर्षा (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
यह है मान्यता 
द्वापर युग में भगवान कृष्ण नंदगांव में पले बढ़े, जबकि राधा का गांव बरसाना है। राधा और श्रीकृष्ण के पावन प्रेम के चलते आज भी नंदगांव और बरसाना के निवासियों के मध्य वैवाहिक संबंध नहीं किए जाते हैं। इसके पीछे स्थानीय लोगों का भाव यह है कि कहीं नए रिश्तों के चक्कर में कृष्णकालीन रिश्ता धुंधला न पड़ जाए। पांच हजार वर्ष पुराने इस संबंध की मर्यादाओं को आज भी यहां के हर जाति और मजहब के लोग यथावत निभाते चले आ रहे हैं। 

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नंदबाबा मंदिर, नंदगांव - फोटो : अमर उजाला
राधाकृष्ण के पौराणिक रिश्ते को मानते हुए बरसाना के तमाम वयोवृद्ध आज भी राधारानी की ससुराल नंदगांव की सीमा का पानी तक नहीं पीते। आज भी बरसाना के तमाम घरों से बेटी (राधा जी) की ससुराल नंदगांव से आए किसी भी व्यक्ति को जब विदा किया जाता है तो उनको धन, द्रव्य ससम्मान विदा किया जाता है।
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नंदबाबा मंदिर, नंदगांव - फोटो : अमर उजाला
नंदबाबा मंदिर के सेवायत दानबिहारी गोस्वामी ने बताया कि नंदगांव बरसाना के निवासी एक-दूसरे के पूरक हैं। हास परिहास स्वरूप नंदगांव के लोग स्वयं को कृष्ण के सखा मानकर वृषभान के जमाई के रूप में बरसाना के लोगों से परिहास करते हों लेकिन उनके इस परिहास के अंदर भी कृष्ण भक्ति की झलक दिखाई पड़ती है। बरसाना के लाडली जी मंदिर से हर उत्सव पर परंपरागत रूप से निमंत्रण आता है।
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बरसाना की लठामार होली (फाइल) - फोटो : Amar Ujala
नंदगांव का हर युवा कहता है कि बरसाना मेरी ससुराल है। लठामार होली के दौरान बरसाना की महिलाएं भी नंदगांव के युवाओं को देवर मानकर हंसी-ठिठोली करती हैं। उन पर प्रेम पगी लाठियां बरसाती हैं। बरसाना और नंदगांव की लठामार होली विश्व प्रसिद्ध है।  
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