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इस बार होली पर उड़ेगा ठाकुर बांकेबिहारी के चरणों पर चढ़ाए फूलों से बना गुलाल, हो रही यह तैयारी

Thu, 30 Jan 2020 02:29 PM IST
मुकेश कुमार रामकुमार रौतेला, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
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बांकेबिहारी मंदिर में देशी-विदेशी पुष्पों से सजा फूलबंगला (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
इस बार रंगों के त्योहार होली पर ठाकुर बांकेबिहारी के शृंगार में लगे फूलों से बने गुलाल से होली खेलिए। भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली वृंदावन में ठाकुरजी के चरणों में बिछने वाले फूलों से गुलाल बनने का काम शुरू हो चुका है। यह गुलाल पूरी तरह से रसायन मुक्त है। अब यह खास गुलाल लोगों की डिमांड पर घर तक पहुंचेगा।
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बांकेबिहारी मंदिर में होली के रंगों की वर्षा - फोटो : अमर उजाला
मंदिरों की नगरी वृंदावन में प्रतिदिन ठाकुर जी के शृंगार में फूलों का उपयोग बड़ी मात्रा में होता है। खास मौकों पर तो फूल बंगले सजाए जाते हैं। यहां तक कि दर्शन को आने वाले श्रद्धालु भी ठाकुर जी के चरणों में फूलों की माला अर्पित करना अपना सौभाग्य समझते हैं। इस तरह भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली वृंदावन के मंदिरों में प्रतिदिन कई कुंतल विभिन्न प्रकार के फूल ठाकुर जी के शृंगार का हिस्सा बनते हैं। इसमें सबसे अधिक फूल श्रीबांकेबिहारी मंदिर की शोभा बनते हैं।
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गुलाल बनाने में जुटीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
ठाकुरजी के शृंगार से हटने के बाद इन फूलों को फेंकने के बजाए एक बार फिर उपयोगी बनाने के लिए वृंदावन में गुलाल तैयार हो रहा है। वृंदावन वास कर रही पश्चिम बंगाल की महिलाएं इन फूलों से फिलहाल गुलाल बनाने में जुटी हैं। वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित महिला आश्रय सदन में फूलों से तैयार हो रहे इस गुलाल की महक आसपास के वातावरण को भी आनंदित कर रही है। 

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बांकेबिहारी मंदिर में बरसे प्रेमरंग - फोटो : अमर उजाला
यही गुलाल एक बार फिर होली के त्योहार पर ठाकुर जी के माथे पर भी सजेगा। इस खास गुलाल को आम लोगों तक घर बैठे पहुंचाने के लिए महिला कल्याण विभाग ने ऑनलाइन बिक्री की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर विक्रम शिवपुरी बताते हैं कि इस बार होली से पहले ऑन लाइन बिक्री शुरू हो जाएगी। 
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अगरबत्ती तैयार करतीं विधवा महिलाएं
वृंदावन के मंदिरों से एकत्रित होने वाले फूलों से ब्रज गंधा प्रोजेक्ट के तहत धूपबत्ती भी बनाई जा रही है। इस काम को भी यहां रहने वाली बंगाल की महिलाएं हीं करती है, जिसके एवज में उन्हें पारिश्रमिक मिलता है। धूपबत्ती बनाने का काम वर्ष भर चलता है, लेकिन गुलाल सिर्फ दो माह पहले ही बनाया जाता है।
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