हरियाली तीज का त्योहार कान्हा की नगरी में गुरुवार को पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर मथुरा से वृंदावन तक आस्था की अद्भुत छटा बिखरी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित ठाकुर केशवदेव मंदिर जन्मस्थान परिसर में हरी घटा सजाई गई। जहां हरी घटाओं के बीच ठाकुर केशव देव ने श्रद्धालुओं को मनोहारी दर्शन दिए। द्वारिकाधीश मंदिर में फल-फूलों का हिंडोला सजाया गया। तीर्थनगरी वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी स्वर्ण-रजत निर्मित हिंडोले में विराजमान हुए। लेकिन कोरोना के कारण मंदिर के पट बंद होने के कारण अद्भुत शृंगार के साथ ठाकुर जी के विशेष दर्शन भक्त नहीं कर पाए। मंदिर में सिर्फ सेवायतों ने पूजा-अर्चना की।
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हरियाली तीज पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सजाई गई झाँकी
- फोटो : अमर उजाला
प्राचीन केशव देव मंदिर में हरियाली तीज महोत्सव
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित प्राचीन केशवदेव मंदिर में हरियाली तीज महोत्सव की धूम रही। मंदिर परिसर को हरी पत्तियों, लता पताओं से सजाया गया। साथ ही राधा कृष्ण मंदिर में हरी घटाओं के बीच हिंडोले सजाए गए। भागवत भवन को भी हरे रंग की पेशवाई से सजाया गया। सुबह सेवायत श्यामाचरण गोस्वामी, बिहारी लाल गोस्वामी, मुन्नी लाल गोस्वामी द्वारा संयुक्त रूप से मंत्रोच्चारण के बीच पंचामृत अभिषेक और गुलाब इत्र से ठाकुरजी के विग्रह की मालिश की। शाम को फल फूल का बंगला भी सजाया गया और हरे रंग की पेशवाई लगाई गई। माता रुक्मणी और जमुना जी को अलग-अलग चांदी के पलना में विराजमान कर झूला झुलाया गया। भगवान को नजर ना लग जाए, इसके लिए विशेष आरती की गई। रात आठ बजे तक हुए इस दिव्य दर्शनों का दूर दूर से आए भक्तों लाभ लिया।
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द्वारिकाधीश मंदिर में सजाया गया फल-फूल बंगला
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फल फूलों के हिंडोला में विराजे राजाधिराज
हरियाली तीज पर ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर में फल-फूलों का हिंडोला सजाया गया। लता-पता और फल फूलों के बीच विराजे ठाकुर द्वारिकाधीश के दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। शाम को ठाकुर द्वारिकाधीश के लिए फल-फूल और हरी पत्तियों से हिंडोला सजाया गया। मंदिर प्रांगण राजाधिराज के जयकारों से गुंजायमान हो रहा था। भक्त भी फल फूलों के हिंडोले में बैठे राजाधिराज की अलौकिक झांकी को अपलक निहारते रहे। मंदिर के विधि और मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि कोरोना के कारण भक्तों को सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए मंदिर में प्रवेश दिया गया।
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बांकेबिहारी मंदिर में स्वर्ण रजत हिंडोला
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में लगभग सात दशक से चली आ रही परंपरा के अनुसार श्रावण मास शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि (हरियाली तीज) पर ठाकुजी स्वर्ण-रजत निर्मित दिव्याकर्षक हिंडोले में विराजित हुए। प्रात: 7.55 बजे ठाकुर जी की आरती की गई। फिर राजभोग सेवा हुई। ठाकुर जी के लिए विशेष रूप से तैयार किए मलाई घेवर, फैनी, मावा, गुजिया आदि व्यंजन निवेदित किए गए। हालांकि इस बार हरियाली तीज के ठाकुरजी के अद्भुत दर्शन से उनके लाखों भक्त वंचित रहे।
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना के कारण ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है। मंदिर में सिर्फ सेवायत गोस्वामी परिवार सहित सामाजिक दूरी के साथ दर्शन करते नजर आए। मंदिर के द्वारों के साथ परिसर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रहे।
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बांकेबिहारी मंदिर में स्वर्ण रजत हिंडोला (फाइल)
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सुगंधित पुष्पों की सेज पर ठाकुर जी ने किया विश्राम
मान्यता है कि ठाकुर बांकेबिहारी लगातार कई घंटे खड़े होकर अपने भक्तों को कृतार्थ करते हैं, लेकिन थकान होने से ठाकुर जी का मनमोहनी सजीला शृंगार अव्यवस्थित हो जाता है, तब ठाकुर जी को रात्रि में सुगंधित पुष्पों की लड़ी पिरोकर व गुलाबी मखमली सेज पर गुलाब की पंखुड़ियों से बिखेर कर विश्राम कराया जाता है। रजत निर्मित सेज के पास चांदी का नक्काशीदार शीशा व शृंगारिक प्रसाधन रखे गए। चांदी के थाल में पान का बीड़ा, मोतीचूर के लड्डू, केशरमिश्रित दूध आदि निवेदित किए गए। हालांकि ठाकुर जी की सुखसेज के दर्शन कभी भक्तों को सुलभ नहीं होते हैं।
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सनेह बिहारी मंदिर में सजा फूल बंगला एवं झूले
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वृंदावन के अन्य प्रमुख देवालयों में भी झूलनोत्सव (हरियाली तीज) आस्था पूर्वक मनाया गया। श्री वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख दिव्यदेश श्री रंगनाथ मंदिर में दस दिवसीय गोदम्मा की अवतरण उत्सव के उपरांत हरियाली तीज पर ठाकुर गोदारंगमन्नार भगवान रजतनिर्मित झूले पर विराजमान हुए। ठाकुर राधास्नेह बिहारी मंदिर, श्री राधाबल्लभ मंदिर, श्री राधारमण जी मंदिर में भी रजत निर्मित झूले सजाए गए। ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी महाराज को मंदिर के जगमोहन में भव्य स्वर्ण रजत झूले में बिठाकर दर्शन कराए गए। पूरे मंदिर परिषद को हरे वस्त्रों से सजाया गया। इस विशेष अवसर पर भक्तों को ऑनलाइन दर्शन कराए गए।
हरियाली तीज पर जहां मंदिरों में झूलनोत्सव मनाया गया, वहीं घर-घर में तीज के त्योहार को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखा गया। महिलाओं ने हरी साड़ी और हरी चूड़ियों पहनकर सोलह श्रृंगार किए। व्रत रखकर भगवान शिव और मां पावर्ती का पूजन किया गया। कई स्थानों पर महिलाओं ने झूले पर बैठ सावन की मस्ती में सराबोर रहीं। ढोलक की थाप पर महिलाओं ने मल्हार गाकर राधा और कान्हा सा प्रेम उनके जीवन में बने रखने की कामना की। हालांकि कोरोना के कारण शहर में इस बार तीज के कार्यक्रम बहुत कम हुए।