ताजमहल पूर्वी गेट के पास ताज टैनरी की ओर हाथीखाना की बुनियाद को मजबूत करने का काम 350 साल बाद शुरू हुआ है। मुगलकाल में ताजमहल के निर्माण के दौरान हाथियों को इसी जगह पर बांधा गया था। दो साल पहले एएसआई ने हाथीखाना को संरक्षित घोषित किया। उससे पहले यह इमारत बेहद जर्जर हो चुकी थी। चार फुट मोटी हाथीखाना की दीवारों में से तीन फुट तक ईंटें निकाल ली गईं, जिन्हें संरक्षण के दौरान लगाया जा रहा है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने हाथीखाना का संरक्षण शुरू किया है। पहले चरण में बुनियाद को मजबूत करने का काम चल रहा है। इसकी दीवारों पर ईंटें लगाने का काम जारी है। पहले चरण में 20 लाख रुपये खर्च होंगे। अप्रैल तक यह काम खत्म कर लिया जाएगा। एएसआई के वरिष्ठ संरक्षण सहायक अमरनाथ गुप्ता के निर्देशन में हाथीखाना को संरक्षित करने का काम पहली बार किया जा रहा है।
विज्ञापन
2 of 5
हाथीखाना में संरक्षण कार्य करते मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे पड़ गया नाम हाथीखाना
ताजमहल के गुंबद तक संगमरमर के बड़े-बड़े पत्थरों को पहुंचाने के लिए हाथियों का इस्तेमाल किया गया था। ताज टैनरी के आगे तक मुख्य गुंबद से रैंप बनाई गई थी। ताज टैनरी के पास इन हाथियों को जहां बांधा गया, उस जगह का नाम हाथीखाना पड़ गया। यहां बड़े गुंबद वाली इमारत के पास बड़ा मैदान है, जो ताज टैनरी तक बना हुआ है। हाथीखाना के बाद ही मिट्टी के ऊंचे ऊंचे टीले हैं, जिन्हें ताज के लिए बनाई गई रैंप में इस्तेमाल किया गया था।
विज्ञापन
3 of 5
हाथी खाना के संरक्षण का कार्य करते मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे चरण में होगा छत का काम
हाथीखाना को कुछ समय पहले ही संरक्षित घोषित किया गया है। यह बेहद जीर्ण शीर्ण हालत में था, जिस वजह से इसकी बुनियाद मजबूत करने का काम सबसे पहले करेंगे। जमीन से पांच फीट ऊंचाई तक दीवारों से निकली ईंटों को लगा रहे हैं, फिर दूसरे चरण में छत का काम करेंगे। वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद
4 of 5
महताब बाग के पास ग्यारह सीढ़ी स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
महताब बाग के पास ग्यारह सीढ़ी स्मारक स्थित है। यह एक खगोल वेधशाला का भग्नावशेष है। जोकि मुगल शासक हुमायूं द्वारा बनवाई गई थी। पर्यटक महताब बाग तो आते हैं लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यहां तक नहीं पहुंच पाते।