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अस्थायी गोशाला में भूख-प्यास से तड़प रहे गोवंश, न चारे की व्यवस्था और न पीने का है पानी

Sun, 24 Feb 2019 02:15 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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गोशाला में गोवंश
आगरा के सिकंदरा क्षेत्र के अस्थायी आश्रय स्थल में बंद गोवंश की स्थिति काफी दयनीय होती जा रही है। यहां कई-कई दिन तक गोवंश को खाने के लिए चारा तक नहीं मिल रहा। वो भूख से तड़पने को मजबूर हैं। आश्रय स्थल पर पीने के पानी तक नहीं है। इससे उनकी स्थिति बिगड़ती जा रही है। बीमार और घायल गोवंश के उपचार तक की व्यवस्था नहीं है।
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गोशाला में गोवंश
किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे और सड़कों पर आवारा घूम रहे गोवंश के लिए पशुपालन विभाग ने पिछले दिनों अस्थायी रूप से आश्रय स्थल बनाया था। नगर निगम की टीमें यहां विभिन्न क्षेत्रों से गोवंश को पकड़-पकड़ कर छोड़ जाती हैं। इन रखवाली के लिए दो कर्मचारी अस्थायी रूप से रखे गए हैं। मगर, यहां आने के बाद गोवंश की भूखा रखा जा रहा है। 
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गोशाला में गोवंश
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पहले आसपास घूमकर ये अपना पेट भर लेते थे लेकिन जब से चार दीवारी में कैद हुए हैं, तब से भूख से तड़प रहे हैं। वर्तमान में 500 से अधिक गोवंश को यहां बंद करके रखा गया है। इनमें से कई गोवंश गंभीर रूप से घायल हैं और कुछ बीमार हैं, लेकिन इसको भी कोई देखने वाला नहीं है। कहने को तो पास में ही पशु चिकित्सालय की बिल्डिंग हैं लेकिन ये बंद पड़ी है। 

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अस्थायी गोशाला
आश्रय स्थल के आसपास के कुछ लोग समय निकाल कर मदद को अपने कदम आगे बढ़ा हैं। शनिवार को कुछ लोग एक घायल गाय को आश्रय स्थल पर छोड़ गए थे। ये चलने-फिरने में असमर्थ थी। इसकी मदद को पास के ही कुछ लोग दोपहर को चारा लेकर पहुंचे। साथ ही उसका उपचार भी कराया। मगर, उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
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अस्थायी गोशाला
आश्रय स्थल की व्यवस्थाएं सिर्फ दो ही अस्थायी कर्मचारियों के कंधों पर हैं। ये भी मौके पर कम ही मिलते हैं। आसपास के लोगों का कहना है कि इस आश्रय स्थल के जिम्मेदार अफसर कई दिनों से व्यवस्थाएं देखने नहीं आए। गोवंश के लिए चारे की व्यवस्था है या नहीं, इसको भी कोई देखने वाला नहीं है।
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अस्थायी गोशाला में गोवंश
क्षेत्रीय निवासी श्याम कुमार अग्रवाल ने कहा कि यहां की व्यवस्थाएं बहुत लचर हैं। हमसे जितना हो सकता है, गोवंश की उतनी मदद कर देते हैं। शेष गोवंश की स्थिति दयनीय है। घायल गोवंश के उपचार की भी किसी ने सुध नहीं ली है। संजीव पाठक ने कहा कि कई-कई दिन तक गोवंश को चारा नहीं मिल पाता है। उनके लिए पानी तक की व्यवस्थाएं नहीं हैं। नगर निगम के कर्मचारी यहां उन्हें छोड़ तो जाते हैं लेकिन इसके बाद कोई पलटकर देखने नहीं आता।
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