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हर तनाव भूल जाओगे...जब गिरिराज की शरण में आओगे, ये हैं 21 किमी परिक्रमा के अहम पड़ाव

Fri, 12 Jul 2019 11:14 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोवर्धन (मथुरा)
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मुड़िया पूर्णिमा मेला (फाइल)
बड़ी शांति मिलती है गिरिराज जी की शरण में। एक बार परिक्रमा करोगे तो हर टेंशन भूल जाओगे। यह कहना है कि गिरिराज की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं का। वैसे तो सालभर गिरिराज परिक्रमा होती है, लेकिन पांच दिवसीय मुड़िया पूर्णिमा मेला के दौरान यहां आस्था का जनसैलाब नजर आता है। इस बार 12 जुलाई से मुड़िया मेला शुरू हो रहा है। अभी से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है। अगली स्लाइड्स में जानिए 21 किलोमीटर की गिरिराज के अहम पड़ाव के बारे में.... 
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गिरिराज परिक्रमा का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
गिरिराज भगवान की जय, बांसुरी वाले की जय। कृष्ण भगवान की जय। राधा रानी की जय। बोलो...राधे-राधे। इन जयकारों के साथ दानघाटी मंदिर से गिरिराज जी की परिक्रमा शुरू होती है। हर तरफ भक्तों का समुंदर दिखेगा। नाचते गाते भक्त। जयकारे लगातीं नौजवानों की टोलियां। यकीन मानिए एक ऐसा नजारा होता है कि आपको पता ही नहीं चलेगा कि कब आप पहले पड़ाव (आन्यौर) पर पहुंच जाएंगे। 
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मुड़िया मेला का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली से आए 70 साल के पूजन प्रकाश कहते हैं कि पहली परिक्रमा गाड़ी से लगाई थी। दूसरी परिक्रमा में कुछ दूर चला। आज गिरिराज जी ने इतनी ताकत दे दी है कि पूरी परिक्रमा पैदल लगा लेता हूं। जयपुर की मालती चौहान हर माह गिरिराज जी की परिक्रमा लगाती हैं। चलिए अब परिक्रमा मार्ग में आगे बढ़ते हैं...

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मुड़िया पूर्णिमा मेला (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
दूसरा पड़ाव आता है पूंछरी का लौठा। यहां ठहर कर परिक्रमार्थी मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। यहां भी हर तरफ राधे राधे की धूम रहती है। यहां अमर उजाला टीम ने गाजियाबाद में लोहिया नगर निवासी सुमन शर्मा और उनके साथ आईं मिथलेश सिंघल, सरोज गर्ग और सुनीता से बात की। ये सभी हर एकादशी को परिक्रमा लगाने के लिए आती हैं। इन सभी की उम्र पचपन साल से ऊपर की है। 
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
पूंछरी की लौठा से आगे बढ़ते हुए जतीपुरा मुखारबिंद पर पहुंचते हैं। यहां गूंजने वाले जयकारे माहौल को कृष्णमय बनाए रहते हैं। भरतपुर से आए कोमल सिंह का कहना था कि पहले दो किलोमीटर भी नहीं चल पाते थे, लेकिन अब 21 किलोमीटर की परिक्रमा पूरी करता हूं। यहां से आगे बढ़कर परिक्रमार्थी राधाकुंड में पहुंच जाते हैं। 
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मुड़िया मेला का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
राधाकुंड में सबसे पहले बैठका पड़ती है। यहां परिक्रमार्थी आराम करते हैं और राधा-रानी के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ जाते हैं। यहां से होते हुए राधाकुंड और श्यामकुंड पर परिक्रमा पहुंचती है। यहां भक्त पूजा अर्चना करते हैं। इसके बाद हरगोकुल मंदिर और मानसी गंगा होते हुए 21 किलोमीटर की परिक्रमा का विराम होता है।
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