असम में तैनात में रहे गश्त के दौरान शहीद हुए मथुरा के लाल शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। इस दौरान हर आंख में आंसू थे। हर कोई रो पड़ा।
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रोता-बिलखता शहीद का बेटा
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ने शहीद के सम्मान में उनके पैतृक गांव पहुंचे और शहीद स्मारक और गांव के बाहर गेट बनवाने की घोषणा की।
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रोते-बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि शहीद के परिजनों को 20 लाख रुपये देने की घोषणा की। कहा कि एनएच टू के किनारे स्मारक बनाया जाएगा।
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शहीद कशहीद को दी सलामी
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा गांव में शहीद गेट बनने की भी उन्होंने घोषणा की। वहीं शहदी कालीचरण के पार्थिव शरीर को उनके बड़े बेटे अरुण ने मखाग्नि दी। इस दौरान अरुण की आंखों से आंसू बह रहे थे।
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शहीद के बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
सेना के जवान को अंतिम विदाई दी गई। वहीं जवान को आखिरी सलामी देने के लिए लोगों का तांता लग गया। हर कोई नम आंखों से शहीद को सलामी दे रहा था।
कालीचरण अपने दो भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा अरुण आठ वर्ष का का है जबकि एक बेटा और बेटी उससे छोटे हैं।