इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा की नगरी में अद्भुत और भव्य नजारा होगा। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या के बहरुपिये यहां ब्रजवासियों का मनोरंजन करेंगे तो मणिपुर के युवा मार्शल आर्ट का प्रदर्शन। इस दौरान उड़ीसा के कलाकार शंखनाद नृत्य करेंगे तो घूमर नृत्य से हरियाणा के कलाकार कान्हा के भक्तों को आनंदित कर रहे होंगे। देशभर की यह सांस्कृतिक विरासत तीन दिन मथुरा की सड़कों पर नजर आएगी।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी पर परंपरागत रूप से मनाया जाने वाला भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इस बार एक दिवसीय नहीं बल्कि तीन दिवसीय होगा। इन तीन दिन के दौरान मथुरा में देशभर की सांस्कृतिक झलक नजर आएगी। इसके लिए विभिन्न राज्यों के लोक कलाकार 22 अगस्त तक मथुरा पहुंच रहे हैं। ये कलाकार तीन दिन मथुरा के अलग-अलग रास्तों पर अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
एक दिन श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शुरू होकर रैली के रूप में इन लोक कलाकारों की सांस्कृतिक झांकी डीगगेट, चौक बाजार, मंदिर श्रीद्वारिकाधीश होते हुए विश्रामघाट तक जाएगी। इसके बाद अगले दिन यही कलाकार अपनी प्रस्तुतियां श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शुरू होकर डीगगेट, दरेसी, भरतपुरगेट, होलीगेट होते हुए नगर निगम कार्यालय तक देंगे। अंतिम दिन इन कलाकारों के लिए भूतेश्वर होते हुए डेंपियर नगर तक का रास्ता चयनित किया गया है।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान
- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा बनाए गए इस प्रोग्राम में नोएडा के कलाकारों को गूजरी नृत्य के लिए आमंत्रित किया गया है तो राजस्थान और अयोध्या के कलाकारों ने बहुरूपिया का प्रदर्शन करने की स्वीकृति प्रदान की है। इनके अलावा उत्तराखंड, झारखंड, मणिपुरी, हरियाणा, उड़ीसा, मध्यप्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से यहां लोक कलाकार मथुरा आ रहे हैं। इसमें ब्रज के कलाकारों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। जिला पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने बताया कि यह आयोजन पहली बार हो रहा है। यह मथुरा के साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।
भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाने के लिए देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं ने ठहरने के लिए होटलों और गेस्ट हाउसों में बुकिंग करानी शुरू कर दी है। नगर में जगह-जगह भंडारों के साथ ही कान्हा के भक्तों के ठहरने के लिए मथुरावासी तैयारियों में लगे हैं। कई स्थानों पर पंडालों का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं जन्मस्थान मंदिर पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।