ताजनगरी की धरती पर पहली बार केसर की फसल महकी है, लेकिन लॉकडाउन के कारण उसकी बिक्री अटक गई है। जिले की तहसील किरावली के गांव पनवारी में पौने दो एकड़ में केसर की फसल लगाई गई है। लॉकडाउन के कारण फसल की गुणवत्ता की जांच प्रयोगशाला में नहीं हो पा रही है। बिना जांच केसर बिक नहीं सकती।
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केसर की खेती करने वाले किसान शिशुपाल सिंह
- फोटो : अमर उजाला
आगरा जिले में पहली बार केसर की खेती गांव पनवारी के शिशुपाल सिंह ने की। बीते साल पौने दो एकड़ में अक्तूबर में इसकी बुवाई की। इसमें करीब दो लाख रुपये की लागत आई। साढ़े छह महीने में फसल पककर तैयार हो गई। अब इसकी कुटाई भी शुरू हो गई है, अभी तक 50 किलो केसर निकली है। कुछ फसल बकाया है, जिसमें 20 किलो और केसर निकलने की संभावना है।
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केसर की क्यारी
- फोटो : अमर उजाला
केसर की बिक्री से पहले दिल्ली की स्टैंडर्ड एनालायटिकल लैबोरेटरी में इसकी गुणवत्ता की जांच होनी बाकी है। किसान ने बताया कि लॉकडाउन के चलते प्रयोगशाला बंद है। इससे इसकी जांच नहीं हो पाने से बिक्री रुकी हुई है। खरीददार गुणवत्ता के प्रमाणपत्र के बाद ही केसर खरीदेंगे।
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केसर
- फोटो : अमर उजाला
50 हजार से एक लाख रुपये प्रति किलो की है कीमत
केसर की कीमत उसकी गुणवत्ता के आधार पर तय होती है। यह 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक प्रति किलो के दाम में बिकती है। पौने दो एकड़ में लगभग 70 किलो केसर और दो क्विंटल बीज निकलेगा। किसान ने इसकी बिक्री के लिए कश्मीर, दिल्ली, जयपुर और आगरा में भी बात की है। खरीदार प्रयोगशाला की प्रमाणित रिपोर्ट मांग रहे हैं, इसके बाद ही खरीद की जाएगी।
केसर की खेती करने वाले किसान शिशुपाल सिंह
- फोटो : अमर उजाला
पहले करते थे आलू की खेती
आगरा में पहली बार केसर की खेती की गई है। किसान ने बताया कि पहले वो आलू की खेती करते थे, लेकिन नुकसान होने के बाद उन्होंने केसर की खेती की। इसमें उद्यान विभाग के अधिकारियों की मदद ली। अब नींबू, अनार समेत अन्य फलों की भी खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनसे प्रेरित होकर और भी किसान केसर की खेती करने की तैयारी में हैं।