फिरोजाबाद जिले के गांव नारखी धौकल में मां की हत्या के बाद आत्महत्या करने वाली दोनों बहनों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। दोनों बहनें ममता और रेनू पढ़ाई में औसत थीं। ममता बीएससी करने के बाद नारखी क्षेत्र के गांव राजपुर स्थित कॉलेज से बीटीसी कर रही थीं। तीन सेमेस्टर पास करने के बाद चौथे सेमेस्टर में दो बार फेल होने के कारण उसने आगरा से बीटीसी करने का निर्णय लिया और रेनू बीए कर चुकी थी। इसके बाद उसने पढ़ाई बंद कर दी थी। आगरा से बीटीसी करने के लिए ममता ने आगरा कमला नगर में किराए पर मकान लिया था। यहां वह रेनू के साथ रहती थी। हालांकि दोनों बहनें आगरा का पता किसी को नहीं बताती थीं। यें बात मृतका विमलेश के बड़े बेटे राधेश्याम ने बताई हैं।
नारखी थाना क्षेत्र के गांव नारखी धौकल में शनिवार शाम को महिला विमलेश और उसकी बेटियों के शव मकान के एक ही कमरे में क्षत-विक्षत हालत में मिले थे। विमलेश का शव फर्श पर पड़ा था, जबकि दोनों बेटियों रेनू व ममता के शव फंदे से लटके हुए थे। मकान का दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिस छत पर चढ़कर मकान में घुसी थी।
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मकान के बाहर जांच करते पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
मृतक बहनों के भाई राधेश्याम ने बताया कि बहनों की हरकतों के कारण उन्हें तीन बार मकान बदलना पड़ा था। एक मकान स्वामी ने तो ममता और रेनू का सामान जबरन घर से बाहर फेंक दिया था। ममता की सूचना पर न्यू आगरा पुलिस मौके पर पहुंची थी और सामान लोडिंग वाहन में रखकर नारखी तक छोड़ने आई थी।
पुलिस के कहने पर ममता और रेनू को अलग-अलग करने के लिए परिवार ने कई प्रयास किए, लेकिन दोनों बहनें कभी अकेली नहीं रहती थी। कई बार अगल-अलग रखने का प्रयास किया तो पुलिस को बुला लेती थीं। यहां तक की ममता और रेनू 24 घंटे में एक मिनट भी एक-दूसरे के बिना नहीं रह पाती थी। पिता उनसे मिलने जाते थे तो ममता उन्हें बल्केश्वर चौराहे से ही वापस भेज देती थी।
नौकरी के बाद शादी करने की कहती थी बात
भाई राधेश्याम ने बताया कि रेनू और ममता से शादी करने के लिए कहा जाता तो वे एक ही बात कहती थीं कि नौकरी नहीं लगेगी तब तक शादी नहीं करेगी। इस कारण परिवार के लोगों ने उनके लिए लड़का देखना भी शुरू नहीं किया था।