यूं तो बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी पिता के कंधों पर होती है, लेकिन भोगांव तहसील क्षेत्र के गांव अहिरवा में एक पिता को कैंसर ने लाचार कर दिया। आजीविका का एक मात्र साधन दुकान में ताला लटक गया। बेटियों ने पिता के साथ परिवार को संभाला। बंद हुई मिठाई की दुकान एक बार फिर शुरू की। आज पढ़ाई के साथ-साथ बेटियां मिठाई और समोसा बेचकर परिवार का भरण पोषण कर रहीं हैं। खुद सरकारी स्कूल में पढ़ रहीं हैं, लेकिन भाइयों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं। अगली स्लाइड में पढ़िए परिवार की पूरी कहानी...
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कैंसर की बीमारी से जूझते पप्पू श्रीवास्तव
- फोटो : अमर उजाला
अहिरवा गांव निवासी पप्पू श्रीवास्तव करीब तीन वर्ष पहले मुंह के कैंसर का शिकार हो गए। 12 जनवरी 2018 को उन्होंने मुंह के कैंसर का ऑपरेशन करा लिया। परिवार में सबकुछ ठीक था, तभी करीब सात महीने पहले पप्पू को फेंफड़ों का कैंसर हो गया। बीमारी के चलते गांव में संचालित उनकी जनरल स्टोर व मिठाई की दुकान में ताला लग गया। परिवार की माली हालत बिगड़ गई। पिता और घर की हालत देखकर बेटी वर्षा (22) और नेहा (20) ने हिम्मत दिखाई। बंद हुई दुकान को पांच महीने पहले फिर चालू कर लिया। जनरल स्टोर में आज सामान नहीं है, लेकिन दोनों बेटियों ने मिठाई और समोसे बेचकर परिवार पर आए आर्थिक संकट का कुछ हद तक समाधान किया। आज पप्पू की चारों बेटियां बारी-बारी से दुकान पर समय देती हैं।
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कैंसर की बीमारी से जूझते पिता का हौसला बनीं बेटियां, परिवार के साथ
- फोटो : अमर उजाला
नहीं कर सकीं ऑनलाइन पढ़ाई
पप्पू श्रीवास्तव का परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। घर में स्मार्ट फोन न होने के चलते पप्पू की बेटियां लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई से दूर रहीं। अब इन्हें अपने परीक्षा परिणाम की भी चिंता है।
भाइयों को बेहतर शिक्षा दिलाना है लक्ष्य
पप्पू की चारों बेटियों का लक्ष्य अपनी पढ़ाई के साथ ही भाइयों को बेहतर शिक्षा दिलाना है। उनका मानना है कि पढ़ लिखकर नौकरी करने पर ही परिवार की स्थिति सुधरेगी। बेटी वर्षा शहर के आरसी डिग्री कॉलेज में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा है। नेहा लोधीपुर स्थित डिग्री कॉलेज में बीएससी द्वितीय वर्ष, रश्मी (18) आरसी इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट, आकांक्षा (15) आरसी इंटर कॉलेज में दसवीं की छात्रा हैं। भाई विशाल (13) कक्षा आठ और हर्ष (11) कक्षा पांच का छात्र है। दोनों ही भाई गांव के पास स्थित एक विद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं।
कैंसर से जूझते पिता का हौसला बनीं बेटियां, पप्पू श्रीवास्तव
- फोटो : अमर उजाला
परिवार को है मदद की दरकार
पप्पू श्रीवास्तव भूमिहीन हैं। उनका इलाज आयुष्मान भारत योजना से आगरा के एक प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है। पप्पू श्रीवास्तव का कहना है कि उनके परिवार को सरकारी मदद की दरकार है। उन्हें ज्यादा कुछ नहीं सिर्फ दो-चार बीघा जमीन का पट्टा मिल जाए, वह ही पर्याप्त है। सामाजिक संगठनों की ओर से भी इस परिवार को कोई मदद अब तक नहीं मिली है।
परिवार की आर्थिक स्थिति के संबंध में जानकारी कराई जाएगी। नियमानुसार जो भी मदद संभव हो सकेगी वह की जाएगी। सुधीर कुमार, एसडीएम भोगांव।