स्टोन व मार्बल हैंडीक्राफ्ट उद्योग का कठिन दौर समाप्त होता जा रहा है। ताज में सैलानियों की संख्या में इजाफा होने के कारण एंपोरियम में रखे नन्हे ताजमहल चमकने लगे हैं। बीते करीब एक माह में कारोबार पांच से 25 फीसदी तक बढ़ गया है। इसके चलते 50 हजार में से करीब 30 हजार कारीगरों के हाथों को फिर काम मिलने लगा है। हालांकि अभी दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों की संख्या काफी सीमित है। इनके बढ़ने से खरीदारी तेज हो जाएगी।
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संगमरमर का ताजमहल का नमूना खरीदते पर्यटक
- फोटो : अमर उजाला
आगरा मार्बल स्टोन हस्तकला गृहउद्योग के अध्यक्ष सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि लॉकडाउन से पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लगा है। इसे व्यवस्थित होने में समय लग रहा है, लेकिन सैलानियों की संख्या में इजाफा होने से काम कुछ हद तक चल निकला है। गोकुलपुरा, ताजगंज समेत अन्य क्षेत्रों में काम शुरू हो चुका है। हालांकि इस समय जो पर्यटक आ रहा है, वह शहर में ठहरने के बजाय सीधे चला जा रहा है। रुकने पर वह ज्यादा खरीदारी करता है। उम्मीद है कि धीरे-धीरे यह संख्या भी बढ़ जाएगी।
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धूप में दमकता ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
निर्यात भी करीब 80 फीसदी हो रहा है
पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने से उद्योग में भी सकारात्मकता बढ़ी है। एक माह में कारोबार अनुमानित 25 फीसदी तक आ गया है। दिन बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बढ़ जाएगा। इधर, निर्यात भी करीब 80 फीसदी हो रहा है। - प्रहलाद अग्रवाल अध्यक्ष, आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर
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एंपोरियम की सफाई करते कारीगर का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
30 हजार कारीगरों काम में जुटे
ताजनगरी के हस्तशिल्प उद्योग की स्थिति में पहले से सुधार है। अनुमानित 30 हजार कारीगर काम में जुट गए हैं। इससे बेहतर करने के लिए हम लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चला रहे हैं। कई योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। - अशोक कुमार गुप्ता, सहायक निदेशक, कार्यालय विकास आयुक्त हस्तशिल्प
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एंपोरियम में रखे छोटे ताजमहल के फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
रोजाना 450 रुपये तक की हो रही कमाई
मैं पिछले 12 साल से इस काम से जुड़ा हूं। ऐसे दिन पहले कभी नहीं देखे थे। काम हाथ से छिन गया था। इधर, ताज पर सैलानियों की आमद बढ़ने से दोबारा काम मिलने लगा है। रोजाना 450 रुपये तक कमा पा रहा हूं। घर का खर्च भी उठा लेता हूं। - शाहनवाज खान, हस्तशिल्पी
बीते कुछ माह काफी परेशानी भरे गए
मैं पिछले 30 साल से पच्चीकारी के काम से जुड़ा हूं। बीते कुछ माह काफी परेशानी भरे गए हैं। हालांकि काम अब भी अधिक नहीं है, लेकिन उम्मीद है कि आगे चलकर यह बढ़ जाएगा। क्योंकि सैलानियों के कदम पड़ने लगे हैं। - सज्जाद हैदर, हस्तशिल्पी