देश के लिए शहीद होने वाले सीआरपीएफ जवान वीर सिंह के गांव में उनके अंत्येष्टि स्थल पर 11 माह बाद भी स्मारक नहीं बन सका है। उनके घर की ओर जाने वाला रास्ता भी अब तक जर्जर हाल में है। शहीद के घर में 15 दिन से बिजली तक नहीं है। परिवार बेबसी की जिंदगी जी रहा है और सरकार व प्रशासन को इसकी सुध तक नहीं। हाल यह है कि वीर सिंह के पिता जब बैंक में शहीद के पिता होने का हवाला देते हैं तो बैंक वालों का जवाब होता है, हम क्या करें। अमर उजाला की टीम जब शहीद के गांव पहुंची तो परिवारीजनों का दर्द गुस्से के रूप में सामने आया।
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शहीद वीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
तहसील मुख्यालय शिकोहाबाद से मैनपुरी रोड पर करीब छह किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कंथरी के नगला केवल निवासी रामसनेही के बड़े बेटे वीर सिंह 25 जून 2016 को पंपोर में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। सीआरपीएफ की बटालियन 161 में हवलदार वीर सिंह का शव 26 जून को उनके गांव आया। उस दौरान पहुंचे जनप्रतिनिधि और अधिकारियों ने शहीद के नाम पर कई वादे किए लेकिन आज उनके परिवार की सुध लेने कोई नहीं आता। अमर उजाला ने जब इस गांव में दस्तक की तो शहीद वीर सिंह के परिवार का दर्द सामने आया।
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अंत्येष्टि स्थल
- फोटो : अमर उजाला
वीर सिंह की शहादत को एक साल होने वाला है लेकिन जिस स्थान पर उनका अंतिम संस्कार हुआ वहां स्मारक नहीं बना है। परिवार ने कुछ ईंट डाल कर वीर सिंह की मिट्टी को अब भी ढक रखा है। वादा स्मृति द्वार बनाने का भी किया गया लेकिन अभी शुरूआत तक नहीं हुई। शहीद वीर सिंह के घर में 15 दिन से अंधेरा है। गांव का ट्रांसफार्मर फुंका गया और घर जाने वाले रास्ते पर बिजली के पोल तक नहीं लगे हैं। शहीद के छोटे भाई रंजीत घर से करीब एक किलोमीटर दूर से लाइन खींच कर लाए हैं।
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रामसनेही
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला से बातचीत में पिता रामसनेही बोले बेटा शहीद हुआ तो स्टेट बैंक शिकोहाबाद शाखा के अधिकारी दो बार कागजी कार्रवाई पूरी कराने आए थे और कह गए थे जब भी बैंक आओ हमसे मिलना लाइन में मत लगना। हम दो बार बैंक गए..। जो बैंक अधिकारी आए थे उनसे मिले और बताया कि मैं शहीद का पिता हूं..। बैंक अधिकारी ने टका सा जवाब दे दिया क्या करें शहीद के पिता हो लाइन में लग जाओ...।
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प्रीतादेवी और रजनी
- फोटो : अमर उजाला
शहीद वीर सिंह की पत्नी प्रीतादेवी पति के अपमान और उपेक्षा का दर्द सीने में छिपाए हैं। बोलीं इतनी उपेक्षा देख लगता है कि मेरे पति ने देश के लिए प्राण ही नहीं त्यागे। उनकी वेदना यहीं नहीं रूकी बोलीं हम छोटी जाति के हैं इसलिए कोई नहीं सुनता। हम यादव होते तो पूरी मदद होती...। प्रीतादेवी बोली तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गांव के सामने से गुजर गए लेकिन उनके घर सुध लेने भी नहीं आए...। विधायक हरिओम यादव गेट और सड़क बनवाने की कह गए लेकिन फिर नहीं आए...। शहीद की बेटी रजनी से अमर उजाला ने जब एक मई को भारत के दो जवानों के साथ हुए बर्ताव का जिक्र किया तो रजीन अपने पिता के अंत्येष्टि स्थल की ओर इशारा करते हुए रजनी बोलीं देखिए यह है शहादत का सम्मान।
मामले में जब विधायक सिरसागंज हरिओम यादव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि शहीद वीर सिंह के अंत्येष्टि स्थल पर स्मारक बनवाने और मूर्ति लगाने की जिम्मेदारी प्रशासन की है। हमने गांव में सड़क निर्माण और जिला पंचायत से स्मृति द्वार बनवाने की बात कही थी। स्मृति द्वार के लिए जिला पंचायत में बजट पास हो गया है लेकिन ग्राम पंचायत की तरफ से ही कुछ विवाद है।