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कासगंज: चुनावी रंजिश में पूर्व प्रधान की हत्या, शव जंगल में फेंका, सोशल मीडिया से हुई शिनाख्त

Sat, 20 Mar 2021 12:14 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज

सार

  • पुलिस ने शव का कराया पोस्टमार्टम
  • चुनावी रंजिश के कारण हत्या की जताई जा रही आशंका
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पूर्व प्रधान बाबूराम साहू का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के कासगंज जनपद के सहावर क्षेत्र के ग्राम म्यांसुर क्षेत्र के पूर्व प्रधान बाबूराम की गला दबाकर हत्या करने के बाद उनका शव कासगंज क्षेत्र के बांकनेर के जंगल में फेंक दिया गया। पूर्व प्रधान की हत्या के पीछे चुनावी रंजिश की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। म्यांसुर के पूर्व प्रधान बाबूराम साहू 15 मार्च को ढोलना क्षेत्र के बिलराम में आईटीआई में नौकरी करने वाले अपने पुत्र अशोक व राजकुमार से मिलने गए थे। उनसे मिलने के बाद देर शाम वह गांव के लिए निकले लेकिन गांव नहीं पहुंच सके। रास्ते से लापता हो गए। कासगंज पुलिस ने उनके शव को बृहस्पतिवार देर सांय बांकनेर क्षेत्र से बरामद कर लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, लेकिन उनके शव की शिनाख्त न हो पाने से परिजनों को सूचना नहीं दी जा सकी। शुक्रवार को उनके शव की म्यांसुर के पूर्व प्रधान के रूप में शिनाख्त हुई। शव की शिनाख्त होते ही परिवार में चीत्कार मच गया। परिजन व ग्रामीण पोस्टमार्टम गृह पर पहुंच गए। एहतियातन गांव में पुलिस तैनात कर दी गई।
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मृतक का फाइल फोटो और कासगंज पुलिस - फोटो : अमर उजाला
सोशल मीडिया से हुई शव की शिनाख्त
कोतवाली पुलिस ने पूर्व प्रधान के शव को शिनाख्त कराने के  लिए सोशल मीडिया पर डाल दिया। सोशल मीडिया के माध्यम से जब परिजनों को जानकारी हुई तो उन्होंने पोस्टमार्टम ग्रह पर पहुंचकर शव की शिनाख्त की। इस मामले में पत्नी मुन्नी देवी ने सहावर थाने में एक दिन पहले ही गुमशुदगी दर्ज कराई थी।  
 
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पूर्व प्रधान की हत्या के बाद शोकाकुल परिवार - फोटो : अमर उजाला
अविश्वास प्रस्ताव के बाद बने थे पहली बार प्रधान
पूर्व प्रधान बाबूराम ने वर्ष 1995 में ग्राम पंचायत सदस्य से अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत की। उस समय गांव के  रईस अहमद प्रधान चुने गए। वर्ष 1998 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद प्रधानी उनके हाथ में आ गई। वर्ष 2000 में गांव में जब चुनाव हुआ तो उन्होंने अपनी अपनी पत्नी मुन्नीदेवी को चुनाव मैदान में उतरा और वे चुनाव जीत गईं। वर्ष 2005 के चुनाव में वे स्वयं प्रधान चुने गए। वर्ष 2010 के चुनाव में सीट एससी के लिए आरक्षित हो गई, जिससे उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। वर्ष 2015 के चुनाव में सीट सामान्य होने के बाद भी चुनाव मैदान में नहीं उतरे। वर्तमान चुनाव के लिए पिछले दिनों जो प्रस्तावित सूची जारी गई उसमें सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित हो गई और उन्होंने फिर से चुनाव लड़ने का मन बना लिया और तैयारी शुरू कर दी थी।
 

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कासगंज में पूर्व प्रधान की हत्या के बाद परिवार - फोटो : अमर उजाला
साइकिल सहावर में कर दी थी खड़ी
पूर्व प्रधान बाबूराम 15 मार्च को अपने बेटे के लिए गांव से साइकिल से निकले थे लेकिन उन्होंने साइकिल को गांव के ही परिचित की वर्कशॉप पर खड़ा कर दिया था। इसके बाद कासगंज आकर वे टेंपो से अपने बेटों से मिलने के लिए गए थे।
 
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पूर्व प्रधान की हत्या के बाद मौके पर पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधान की गुमशुदगी दर्ज कर ली गई थी, लेकिन परिजनों ने अभी तहरीर नहीं दी है। गांव के ही एक व्यक्ति पर हत्या का शक जताया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। -राजेश मीणा, सहावर थाना प्रभारी। 

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