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संरक्षण केंद्र में 65 साल की बीमार हथिनी का हुआ इलाज, कैद कर मांगी जाती थी भीख

Fri, 15 Nov 2019 09:28 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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गंभीर रूप से बीमार 65 वर्ष की हथिनी - फोटो : अमर उजाला
चुरमुरा स्थित हाथी संरक्षण केंद्र में एक और गंभीर रूप से बीमार 65 वर्ष की हथिनी को लाया गया है। वाइल्ड लाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग के संयुक्त ऑपरेशन उपरांत यह बीमार हथिनी सीतापुर से आई है।
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बीमार 65 वर्ष की हथिनी - फोटो : अमर उजाला
बीमार हथिनी के पैर में ऑस्टियोआर्थराइटिस और बेडसोर के कारण गंभीर दर्द होता है। उसकी हालत भारत में लगभग 2500 हाथियों की तरह है, जो पर्यटकों की सवारी, सर्कस, शादियों में प्रदर्शन करने और सड़कों पर भीख मांगने में अपना अधिकांश जीवन व्यतीत करते हैं।
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बीमार 65 वर्ष की हथिनी - फोटो : अमर उजाला
वाइल्ड लाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा टीम हथिनी को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए चिकित्सकीय उपकरणों के साथ सीतापुर पहुंची। एंबुलेंस से सीतापुर से मथुरा तक पहुंचाया।

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हाथी - फोटो : अमर उजाला
बचपन में ही जंगल से कैद कर सीतापुर में शादियों और जुलूसों में एक भीख मांगने वाले हाथी के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता था। उत्तरप्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन सुनील पांडे ने कहा कि हमें यह देखकर राहत मिली कि गंभीर रूप से घायल हथिनी अस्पताल में सुरक्षित आ गई है। इसका इलाज चल रहा है जल्द ही यह स्वस्थ हो जाएगी। 
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हाथी संरक्षण केंद्र
साल 2010 में मथुरा के फरह क्षेत्र के चुरमुरा गांव में हाथी संरक्षण केंद्र बनाया गया, जहां बीते साल हाथियों के अत्याधुनिक अस्पताल का उद्घाटन किया गया था। संरक्षण केंद्र में रेस्क्यू कर लाए गए 22 हाथी यहां रह रहे हैं। इनमें 12 मादा और 10 नर हाथी हैं। 
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