यमुना में बढ़ते प्रदूषण का हाल ये है कि अब जहर बन चुके इसके पानी में मछलियों के साथ कछुओं ने भी दम तोड़ना शुरू कर दिया है। गुरुवार को आगरा में यमुना का जलस्तर बढ़ने पर मृत कछुए पानी में उतराते दिखाई दिए।
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यमुना में गिरता नाला का पानी
- फोटो : अमर उजाला
यमुना में प्रदूषण की कहानी नई नहीं है। आगरा और मथुरा में तो इसका पानी छूने लायक भी नहीं रह जाता। इसका कारण दिल्ली के बाद इसमें गिरते नाले और फैक्ट्रियों का कचरा आदि है। दिल्ली से नीचे उतरते ही यमुना में सिर्फ नाले का पानी ही दिखाई देता है।
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मथुरा में यमुना का हाल
भगवान कृष्ण की नगरी में कालिंदी कहलाने वाली यमुना में कलुष इतना है कि जलचरों का भी जीना मुश्किल है। आगरा तक आकर तो स्थिति और भी बदतर हो जाती है। अभी हाल ही में फिरोजाबाद के टूंडला में यमुना के पानी में हजारों मछलियां मृत पाई गई थीं।
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मृत कछुए
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को आगरा में वाटरवर्क्स पर मृत कछुए पानी में तैरते दिखाई दिए। लोगों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले यमुना में कछुओं को मरा हुआ नहीं देखा। ऐसा पहली बार हुआ है कि मरे हुए कछुए पानी में उतराते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने पर ये कछुए यहां आ गए हैं। इनकी मौत जहरीले पानी के कारण हुई है।
माना जाता है कि कछुआ आम तौर पर 300 साल बिना पानी के जीवित रह सकता है। इसके बाद भी यमुना में कछुओं की मौत इसके पानी पर बड़ा सवाल कर रही है। प्रदूषण विभाग कई बार पानी में बीओडी को मानक से कम बता चुका है। इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर यमुना में प्रदूषण रोकने के प्रयास नहीं हो रहे हैं।