आगरा में शाहगंज की पांडव नगर कॉलोनी में कपड़ा कारोबारी रोहित धूपड़ की पत्नी रितू (38), दो बेटियों कायरा (तीन) और सचिका (छह) के बाथरूम में शव मिलने के मामले में पुलिस ने 10 महीने की जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है।
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बाथरूम में जांच करता अधिकारी
माना गया है कि तीनों की मौत गैस गीजर के कारण बाथरूम में बनी जहरीली गैस से दम घुटने से हुई थी। रितू के मायके वालों ने हत्या का केस दर्ज कराया था। तीनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं था। उन्हें कहीं जहर न दे दिया गया हो, इस आशंका पर विसरा परीक्षण कराया गया। इसमें कोई जहर नहीं आया।
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मृतक मां-बेटियों के फाइल फोटो
पुलिस के गले यह बात नहीं उतर रही थी कि बाथरूम में नहाते समय मां और दो बेटियों की मौत एक साथ हो गई होगी। सवाल यह था कि अगर अंदर जहरीली गैस थीं तो उन्होंने गेट खोलकर बाहर निकलने का प्रयास क्यों नहीं किया? लेकिन हर सवाल इस बात पर आकर खत्म हो जाता था कि घर का दरवाजा बाहर से बंद था। वहां सीसीटीवी लगे हैं। घटना से कुछ देर पहले और बाद में न कोई अंदर गया और न ही बाहर आया। रोहित जयपुर हाउस स्थित दुकान पर थे। उनके पिता का जयपुर हाउस में ही दवाखाना है। माता पिता वहीं पर थे।
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पति रोहित के साथ रितु
यह था मामला: रितू, कायरा और सचिका दोपहर को बाथरूम में नहा रही थीं। शाम को रितू का फोन नहीं मिला तो पति रोहित धूपड़ घर आए। मां-बेटियों के शव बाथरूम में मिले। उनके सिर पर शैंपू लगा थी। पानी चलता रहा, पूरी टंकी खाली हो गई थी। गैस गीजर ऑन था। बाथरूम में लगा छोटा एक्जॉस्ट फैन बंद था।
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मां रितु के साथ मासूम कायरा
पुलिस ने विसरा रिपोर्ट पर फोरेंसिक एक्सपर्ट की राय ली। ऐसे केस निकलवाए जिनमें गैस गीजर लगे बाथरूम में लोगों की जान गई। आगरा में ही हरीपर्वत में दंपती की मौत हुई थी। तब जाकर फाइनल रिपोर्ट लगाई है।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डॉक्टर एके मित्तल ने बताया कि अगर बाथरूम में एग्जॉस्ट फैन बंद हो और गैस गीजर चल रहा हो तो यह बेहद खतरनाक है। गीजर में जब आग जलती है तो यह ऑक्सीजन को खत्म करती है। बाथरूम में ऑक्सीजन का स्तर लगातार कम होता जाता है। कार्बन डाई आक्साइड ऑक्सीजन कम होने पर कार्बन मोनोऑक्साइड में बदल जाती है जो जहरीली होती है। वह तीक्ष्ण नहीं होती, इस कारण इसके प्रभाव में आने वाले को पता नहीं चलता। ऑक्सीजन की कमी से इंसान अचेत हो जाता है। कार्बन मोनो ऑक्साइड डेढ़ से दो मिनट में जान ले लेती है।