थाना न्यू आगरा क्षेत्र स्थित अबुल उला मार्ग पर 31 अक्तूबर को नाई की मंडी के तोपखाना निवासी रानी की हत्या पति याकूब ने दो भाइयों अय्यूब और यूसुफ के साथ मिलकर की थी। पुलिस ने शुक्रवार को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पूछताछ में याकूब ने बताया कि पत्नी ने 12 मुकदमे उसके और परिजनों के खिलाफ दर्ज करा दिए थे। इससे वह परेशान हो गया था। इसी कारण उसकी हत्या कर दी।
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रानी हत्याकांड की जानकारी देते पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि रानी की शादी तकरीबन 15 साल पहले लोहामंडी के तेलीपाड़ा निवासी याकूब के साथ हुई थी। उनके दो बच्चे भी हैं। शादी के पांच साल बाद ही दोनों के बीच मनमुटाव हो गया। घर में झगड़े होने पर रानी को कई बार मायके में रहना पड़ रहा था।
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रानी हत्याकांड आगरा
- फोटो : अमर उजाला
दस साल से रानी अपने बेटों के साथ मायके चली गई, तब से आई नहीं। इस पर घरवालों की पंचायत हुई। मगर, कोई हल नहीं निकल सका। तीन साल पहले याकूब ने दूसरी शादी कर ली थी। रानी ने याकूब और उसके परिजनों के खिलाफ 12 मुकदमे दर्ज कराए थे। वहीं याकूब ने भी रानी और उसके परिजनों के खिलाफ मुकदमे लिखा रखे थे। ये मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं।
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रानी हत्याकांड के आरोपी अयूब, यूसूफ और याकूब बाएं से दाएं क्रमशः
- फोटो : अमर उजाला
एसएसपी ने बताया कि गुरुवार रात याकूब, उसके भाई अय्यूब और यूसुफ को खंदारी चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। मुकदमे में तीनों आरोपी नामजद थे। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त तमंचे और दो स्कूटर बरामद किए हैं। तीनों दो स्कूटर से आए थे। आरोपी याकूब पर थाना न्यू आगरा में तीन, लोहामंडी में आठ, जगदीशपुरा और ताजगंज में एक-एक मुकदमा दर्ज है। वहीं अब थाना न्यू आगरा में अय्यूब और यूसुफ पर एक-एक मुकदमा दर्ज किया गया है। खुलासा करने वाली टीम में एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद के नेतृत्व में सीओ हरीपर्वत एएसपी सौरभ दीक्षित, निरीक्षक उमेश चंद त्रिपाठी, एसएसआई विजय सिंह, एसआई योगेंद्र कुमार, श्रीकृष्ण उपाध्याय, सिपाही नितिन कुमार, हरिभान सिंह, धर्मेंद्र अत्री आदि रहे।
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रानी हत्याकांड: घटनास्थल पर पुलिस (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
साजिश : कोर्ट की तारीख पर किया पीछा, सुनसान जगह देखकर मारा
एसएसपी बबलू कुमार के मुताबिक, पूछताछ में याकूब ने बताया कि आए दिन मुकदमों की तारीख करके वह और उसका परिवार परेशान आ गया था। रानी से भी बात की, लेकिन वह समझौते के एवज में 16 लाख रुपये मांग रही थी। उसके पास इतने रुपये नहीं थे। इस पर मना कर दिया। याकूब को यह भी डर था कि रानी अब फिर से आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज करा देगी। इस पर तीनों भाइयों ने रानी से पीछा छुड़ाने की साजिश रची। इसके मुताबिक, जिस दिन वो तारीख पर गई, उसी दिन पीछा शुरू कर दिया। रानी अबुल उला दरगाह की तरफ जाने लगी। सुनसान रास्ते पर उसको घेर लिया। इसके बाद उसे तीन गोलियां दो सिर और एक सीने में मारीं। उसके जमीन पर गिरने के बाद ही वहां से भागे।
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घटनास्थल पर पुलिस (वारदात वाले दिन की तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
शातिर : एक्टिवा पर फर्जी नंबर की प्लेट लगाई
आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी। दोनों एक्टिवा पर फर्जी नंबर की प्लेट लगाई थी, जिससे सीसीटीवी में आने पर भी पता नहीं जाना जा सके। मुंह भी पूरी तरह से ढक लिए थे, जिससे पहचान नहीं होने पाए। इसके बावजूद पुलिस से नहीं बच सके। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज मिल गए थे। इनमें रानी के घरवालों ने याकूब को पहचान लिया था। पुलिस ने एक्टिवा गलत नंबर लिखने पर धोखाधड़ी की धारा भी लगाई है।
याकूब पुलिस से बचने के लिए समर्पण की फिराक में था। इसके लिए तीन दिन से तैयारी कर रहा था। गुरुवार को वह एक अधिवक्ता से मिलने जा रहा था। पुलिस को इसकी जानकारी हो गई थी। पुलिस ने दीवानी के गेटों से लेकर खंदारी चौराहे के आस-पास तक घेराबंदी की थी। मगर, वह नहीं आया। गुरुवार रात याकूब, उसके भाई अय्यूब और यूसुफ को खंदारी चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस याकूब की मदद करने पर उसके दो भांजों को पहले ही जेल भेज चुकी है। अब अन्य संरक्षणदाताओं की तलाश की जा रही है, जिससे मददगारों पर भी कार्रवाई की जा सके।