आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) के चिकित्सकों ने बिना दवा दिए कोरोना के मरीज को संक्रमण मुक्त कर दिया है। यह बड़ी सफलता मानी जा रही है। 16 दिन तक मरीज आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रही। इस दौरान मानसिक रोग विशेषज्ञ उसकी काउंसिलिंग भी करते थे। उससे घर-परिवार की बात करने के अलावा सकारात्मक सोच के बारे में भी बताया जाता था। अगली स्लाइड्स में जानिए कोरोना को कैसे मात देकर स्वस्थ हुई युवती...
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
आगरा कैंट क्षेत्र में रहने वाली युवती में 13 मार्च को कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी। इसे जिला अस्पताल के आइसोलेशलन वार्ड से एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में 14 मार्च को शिफ्ट किया गया था। इसके बाद चिकित्सकों की टीम इसके इलाज में जुट गई। 16 दिन तक सात-सात दिन के रोस्टर प्लान के तहत छह-छह डॉक्टरों की टीम ने इलाज किया। मरीज के बीते तीन नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद देर शाम इसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
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एसएन मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी के निर्देशन में युवती का उपचार चला। डॉक्टर ने बताया कि युवती को दवा देने की जरूरत ही नहीं पड़ी। वो जब भर्ती हुई थी तब कोरोना से पीड़ित मरीजों को दवा देने की कोई गाइडलाइन नहीं थी। अब आ गई है। गाइडलाइन से पहले लक्षणों के आधार पर दवा दी जा रही थी। बुखार हो जाए तो उसकी दवा, खांसी हो तो उसकी।
लेकिन, इस युवती में ऐसा कोई लक्षण नहीं आया। न बुखार हुआ, न खांसी और न ही जुकाम। रिपोर्ट पॉजिटिव थी। ऐसे में चुनौती थी उसे संक्रमण से बाहर निकालने की। यह काम मरीज के शरीर की ताकत ही करती है। डॉक्टरों की टीम ने उपचार का फोकस उसके शरीर की अंदरूनी ताकत (इम्यूनिटी पावर) बढ़ाने पर किया। इसके लिए उसे पौष्टिक आहार और गर्म पानी दिया गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
डॉक्टर माहेश्वरी ने बताया कि पौष्टिक आहार में हरी सब्जियां, पनीर, विटामिन सी वाले फल-सब्जी जैसे संतरा और नींबू दिए। उन्होंने बताया कि कोरोना से बचने के लिए भी ये ही चीजें खानी चाहिए। इनसे शरीर की आंतरिक शक्ति मजबूत होती है। इसके मजबूत होने पर वायरस का हमला कम होता है। यदि हो भी जाए तो वह प्रभावी कम होता है।
यह था डाइट चार्ट
सुबह: नाश्ता में चाय और बिस्किट।
दोपहर: दाल, हरी सब्जी, चपाती, सलाद। केला, सेब, अनार, संतरा और पपीता।
रात: हरी सब्जी, चपाती। इसके बाद दूध।
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आइसोलेशन वार्ड
- फोटो : Amar Ujala
गर्म पानी से कम होती है वायरस की सक्रियता
डॉक्टर ने बताया कि कोरोना वायरस पर कोई स्टडी नहीं है, लेकिन अन्य वायरस के बारे में यह अध्ययन है कि वे सर्दी में ज्यादा सक्रिय होते हैं। जुकाम और खांसी के वायरस भी इसी तरह व्यवहार करते हैं, इसलिए युवती को गर्म पानी पिलाया गया। यह माना जाता है कि गर्मी में वायरस की सक्रियता कम होती है और इस केस में यही हुआ है।
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एंबुलेंस में मरीज
- फोटो : अमर उजाला
चिकित्सकों ने बताया कि युवती ने एक बार भी नकारात्मक विचार व्यक्त नहीं किए। वो कहती थी कि दुनिया में इतने सारे लोग ठीक हो गए, आगरा में खंदारी वाले अंकल और उनका परिवार स्वस्थ हो गया तो मैं भी ठीक हो जाऊंगी। उधर, युवती के पति ने भी कोरोना से जंग जीत ली। उसका उपचार बंगलूरू में चला। इसका पता चलते ही युवती के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने अस्पताल में भगवान का आभार जताया।
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फाइल फोटो
- फोटो : Amar Ujala
पिता पर दर्ज हुआ था केस
युवती अपने पति के साथ यूरोप की यात्रा कर लौटी थी। कोरोना वायरस के लक्षण आने पर इसका जिला अस्पताल में नमूना लिया गया था। जब टीम घर पहुंची तो पिता ने युवती को छिपा दिया था। इस कारण उन पर केस दर्ज किया गया था।
11 में से आठ ठीक होकर घर पहुंच गए
शहर में अब तक 11 लोगों में कोरोना का संक्रमण मिला है। इनमें से आठ संक्रमण मुक्त होकर घर पहुंच चुके हैं। पांच लोग खंदारी के जूता कारोबारी के परिवार के हैं। एक उनका कर्मचारी है। सातवां कर्मचारी की पत्नी। आठवीं रेलवे अधिकारी की बेटी। अभी तीन का उपचार चल रहा है। इनमें दो युवक और एक युवती हैं।