आगरा के अमित चतुर्वेदी ने देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। थाना कागारौल के गांव बीसलपुर निवासी रामवीर चतुर्वेदी सेवानिवृत्त सूबेदार हैं। उनके तीन बेटे सेना में हैं। अमित चतुर्वेदी अप्रैल 2014 में सेना की 17 पैराफील्ड रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। बीते दिन अरुणाचल प्रदेश में उग्रवादियों के हमले में शहीद हो गए। शहीद अमित चतुर्वेदी के बलिदान को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमन किया है। उन्होंने संदेश जारी कर कहा है कि देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान कर देने वाले वीर सपूत अमित चतुर्वेदी को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए शहीद के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
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अमित चतुर्वेदी परिवार के साथ (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि आगरा की मिट्टी बलिदानियों की है। जंग ए आजादी से लेकर देश के दुश्मनों के खिलाफ जंग तक में आगरा के लाल अपनी कुर्बानी दे रहे हैं। अमित चतुर्वेदी के बलिदान को नमन है। उधर जैसे ही अमित के शहीद होने का पता चला, उनके गांव में सैंकड़ों लोग पहुंच गए। देर रात तक सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। अमित चतुर्वेदी के रिश्तेदार भी पहुंच गए। सभी लोग शहीद के पार्थिव शरीर के गांव में पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। वीर सपूत को फूलों की बारिश के बीच अंतिम विदाई दी जाएगी।
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अमित चतुर्वेदी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी के रणबांकुरे मातृ भूमि की रक्षा की खातिर प्राणों का बलिदान देते आए हैं। बाह के रुदमुली जैसे गांवों के वीर योद्धा तो पाकिस्तान और चीन के साथ हुई हर जंग में लड़े हैं। कहरई, लखनपुर, कागारौल, फतेहपुर सीकरी के लाल भी सीमा पर शहीद हो चुके हैं।
शहर से सटे लखनपुर गांव के लाल देवेंद्र सिंह बघेल ने जान देकर भी आतंकियों की घुसपैठ रोक दी थी। देवेंद्र ने 15 मई 2018 को वीरगति प्राप्त की थी। वह बीएसएफ में थे और कश्मीर में तैनात थे। पाकिस्तान की ओर से आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए फायरिंग की जा रही थी। देवेंद्र ने गोली का जवाब गोली से दिया। आंख में गोली लग गई लेकिन मोर्चा पर डटे रहे।
पुलवामा हमले में कहरई गांव के कौशल किशोर रावत शहीद हुए थे। आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर यह हमला इसी साल 14 फरवरी को किया था। कौशल किशोर कई बार आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल रहे। वह कई बार कश्मीर में तैनात रहे।