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Agra Fire News: हर पल लगा मौत का डर, धू-धू कर जलता सामान...फ्लैट में तड़पती जिंदगियां; यूं बचाईं तीन जान

Tue, 09 Dec 2025 10:34 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के ओल्ड विजय नगर काॅलोनी स्थित त्रिवेणी कैस्टल अपार्टमेंट में एलआईसी एजेंट के फ्लैट में आग से घर का सारा सामान जल गया। अब भी पूरा परिवार दहशत में है। 
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आगरा अग्निकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पत्नी और बच्चे फ्लैट के अंदर से बचाओ-बचाओ की आवाज लगा रहे थे। दरवाजे से आग की लपटें निकल रही थीं। सीढ़ियों में धुआं भर गया था। अन्य फ्लैट में रह रहे लोग भागकर भूतल पर आ गए। कहीं से बचने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। दमकलकर्मी अपनी जान की परवाह किए बिना छत से रस्सी लगाकर खिड़की तोड़कर फ्लैट में दाखिल हो गए। एक घंटे तक दहशत रही। हर पल माैत का डर लगा रहा था। आग ने सब कुछ खत्म कर दिया मगर भगवान का शुक्र है कि अपनों की जान बच गई...। हादसे का मंजर बयां करते हुए ये बातें राजीव अग्रवाल ने कहीं। उनके फ्लैट में रविवार शाम को भीषण आग लग गई थी।

अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 401 निवासी राजीव अग्रवाल ने बताया कि वह एलआईसी एजेंट हैं। घर में पत्नी रंजना, बेटा रजत, बहू शिवांगी और बेटी मुस्कान के साथ रहते हैं। अपार्टमेंट में चार फ्लोर हैं। हर फ्लोर पर 4 फ्लैट हैं। वह 20 साल से यहां रहे हैं। रविवार दोपहर ढाई बजे एक परिचित का फोन आने पर वो घर से कमला नगर गए थे।

 
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आगरा अग्रिकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शाम करीब चार बजे आग लग गई। लपटों में पूरा परिवार घिर गया। एक परिचित ने फोन कर हादसे की जानकारी दी। वह पहुंचे तब तक परिवार आग की लपटों के बीच घिरा था।दमकलकर्मी रस्सी के सहारे किसी तरह खिड़की तोड़कर घर में दाखिल हुए। पत्नी, बेटा और बेटी फंसे हुए थे। वह जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे। दमकलकर्मियों ने साहस दिखाया। सभी की जान बच गई मगर घर में सब कुछ जल गया। एक घंटे तक पूरा परिवार दहशत में रहा। उन्हें लग रहा था कि जान नहीं बच पाएगी मगर बाहर आने पर यही कहा कि भगवान बनकर आए दमकलकर्मियों बचा लिया। अब परिवार एक रिश्तेदार के घर में ठहरा हुआ है।


 
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फ्लैट जिसमें लगी थी आग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फ्रिज, एसी, वाशिंग मशीन भी राख
राजीव अग्रवाल के फ्लैट में तीन कमरे हैं। दो में बेटी, बेटा-बहू रहते हैं, जबकि तीसरा कमरा उनका है। इसके साथ ही एक ड्राइंग रूम है। इसके बगल में किचन भी है। इसके पास ही पूजा घर है। राजीव अग्रवाल सोमवार दोपहर को डेढ़ बजे फ्लैट में पहुंचे। अपने साथ आधा दर्जन मजदूर भी लाए थे। ताला खोलकर जैसे ही फ्लैट में गए, आग की भयावहता अलग ही नजर आ रही थी। जमीन पर एसी का आउटर जला हुआ पड़ा था। उसके बाहर की प्लास्टिक की जगह पाइप ही नजर आ रहे थे। फ्रिज और वाशिंग मशीन भी कबाड़ बन गए थे। वहीं सीलिंग फैन की सिर्फ कापर ही बची थी। फाल सीलिंग और झूमर पूरी तरह से जल गए थे। इसके अलावा सोफे, टेबल, कमरों में रखे पलंग, दरवाजे, चाैखट जल गए। फर्श के टाइल्स भी उखड़कर बाहर निकल आए। मंदिर भी आगे से काला पड़ गया था। लड्डू गोपाल की मूर्ति बची थी मगर कपड़े जले हुए थे। दीवारें काली पड़ी हुई थीं। वह देखकर यही कह रहे थे कि सब जल गया। लाखों का नुकसान हुआ है। मजदूरों ने एक-एक करके चाैथी मंजिल से सामान फेंकना शुरू किया तो मिनी मेटाडोर भर गई। राजीव अग्रवाल ने बताया कि घर में शार्ट सर्किट से आग लगने की आशंका है।



 

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फायरकर्मी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पूजा घर में दीपक की लाै से हुआ हादसा
फायर स्टेशन अधिकारी शास्त्रीपुरम महेंद्र प्रसाद वाजपेयी ने बताया कि ड्राइंग रूम में ही पूजा घर बना हुआ था। जांच में पता चला है कि पूजा घर में दीपक जलाया गया था। इसकी लाै से मंदिर में रखे कपड़ों आग लग गई। आसपास पर्दे लगे थे। इनमें भी आग लग गई। इसके बाद आसपास लकड़ी की अलमारी बनी थी। धीरे-धीरे आग भड़कती गई। घर के लोग पहले तो आग बुझाने में लग गए मगर कुछ नहीं हुआ। जब तक बाहर निकलते तब तक लपटें बढ़ गई थीं। इससे बाहर नहीं आ सके। गनीमत रही कि वह खिड़की की तरफ खड़े हुए थे। वहां से शोर मचा रहे थे। खिड़की पर खड़े होने से धुआं निकल जाता है। इससे जान बच जाती है। बाद में दमकलकर्मी गए तब आग बुझ सकी।

 
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फ्लैट में रस्सी के सहारे चढ़ते दमकलकर्मी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऑटोमेटिक लॉक से बंद हो गया दरवाजा
राजीव अग्रवाल ने बताया कि घटना के समय बेटा रजत और बहू शुभांगी फ्लैट से बाहर निकल आए थे लेकिन जब रजत को अंदर मां रंजना और बहन मुस्कान के फंसे होने का पता चला तो वह जान पर खेलकर दोनों को बचाने के लिए दोबारा फ्लैट में घुस गया। दरवाजा ऑटोमेटिक लाॅक हो गया और धुआं भरने के कारण वह भी अंदर फंस गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सोमवार को अपार्टमेंट और आसपास रहने वाले इसी बात की चर्चा कर रहे थे।

 
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फ्लैट में लगी आग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
त्रिवेणी अपार्टमेंट की दूसरी मंजिल पर रहने वाले संजय गुप्ता ने बताया कि आग लगने के दौरान रजत की पत्नी शुभांगी पानी पीने रसोई में गई थीं। कुछ जलने की बदबू आने पर जब वो ड्राइंग रूम में गईं तो मंदिर में आग लगी देख शोर मचाते हुए बाहर निकलीं। पीछे से रजत भी आए पर जब उसने देखा कि मां और बहन बाहर नहीं हैं तो वह उन्हें निकालने के लिए खुद अंदर चले गए। रजत ने बताया कि घटना के समय अपार्टमेंट के अन्य फ्लैट में रहने वाले लोगों ने उनकी मदद का पूरा प्रयास किया। 10 से 12 अग्निशमन यंत्रों और अपार्टमेंट के सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल कर आग बुझाने का प्रयास किया। सही समय पर दमकलकर्मियों के आने से परिवार की जान बच गई। पूरा परिवार अभी घटना से उबरा नहीं है। दो वर्ष पहले उन्होंने शादी से पहले फ्लैट का रेनोवेशन कराया था। लकड़ी का सामान अधिक होने के कारण आग इतनी बढ़ गई थी।


 
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दमकल कर्मी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
22 साल पहले बना था अपार्टमेंंट
त्रिवेणी अपार्टमेंट की पहली मंजिल पर रहने वाले दवा व्यवसायी संजय चौरसिया ने बताया कि 2023 में अपार्टमेंट बना था। सभी 16 फ्लैट्स के निवासी आपस में परिवार की तरह रहते हैं। ढाई वर्ष पूर्व ही सभी ने मिलकर अपार्टमेंट का रेनोवेशन कराया था। आग की घटना के बाद अब सुरक्षा के और इंतजाम किए जा रहे हैं।


 

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परिवार को बचाया - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डर था कि कहीं लपटें अन्य फ्लैट तक न आ जाएं
अपार्टमेंट की तीसरी मंजिल पर रहने वाले विजय पाराैलिया और उनकी पत्नी नीरू गुप्ता ने बताया कि आग लगने वो काफी डर गए थे। उन्हें लग रहा था कि लपटें नीचे तक आ जाएंगी इसलिए वो भूतल पर आ गए। अपार्टमेंट में एक डक्ट बनी हुई है। इससे बिजली के तार निकलते हैं। इस डक्ट से धुआं चारों मंजिल पर भर गया था। इससे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इस कारण ही सीढि़यों से भी कोई बचाव कार्य नहीं कर पा रहा था। अगर आग अन्य फ्लैट में पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।


 
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महिला को फ्लैट से लाते दमकलकर्मी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बिजली आपूर्ति बंद होने से हुई परेशानी
तीसरी मंजिल पर रहने वाली अनीता गुप्ता ने बताया कि घटना के कुछ देर बाद ही बिजली की सप्लाई बंद कर दी गई थी। पीएनजी लाइन से भी सप्लाई को रोक दिया गया था। आग बुझाने के बाद भी लाइन चालू नहीं की गई। पानी डालने की वजह से तारों की लाइन में पानी चला गया था। इससे डर था कि बिजली चालू करने पर आग लग सकती है। इस कारण रातभर बिजली चालू नहीं की गई। वहीं गैस की सप्लाई बंद होने से सुबह चाय और नाश्ते के लिए सभी को परेशान होना पड़ा। भोजन बाजार से मंगवाना पड़ा। ज्यादातर फ्लैट में इनवर्टर लगे हुए हैं मगर यह ज्यादा देर काम नहीं कर सके।
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