आगरा के बाह तहसील के गांवों में दिवाली पर तेजी से घूमते चाकों पर कुम्भकार दीयों को आकार दे रहे हैं। कोरोना काल में बढ़ी दुश्वारियों से आर्थिक संकट के हालात में बेबसी की जिंदगी जीने को मजबूर कुम्भकारों को करवाचौथ पर राहत मिली थी। उन्हें अब दिवाली पर अच्छी बिक्री से अपने घर पर खुशियों के दीये जलने की उम्मीद है।
गांव बिजकौली के नरेश भी दिन-रात दीय बनाने का काम कर रहे हैं। उनकी आंखों की रोशनी चली गई है, सुनाई भी नहीं देता। इसके बाद भी वह दिवाली पर लोगों के घरों को रोशन करने के लिए चाक पर दीपक बना रहे हैं।
नरेश ने बताया कि वह बचपन से ही दीये बनाने का काम कर रहे हैं। शुरू से ही सुनाई नहीं देता है। करीब 11 साल पहले वह बीमार हुए थे। उचित इलाज न मिलने के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। इसके बाद भी उन्होंने काम करना बंद नहीं किया।