भगवान भोले के भक्तों के लिए अच्छी खबर है। स्नान, दान के पर्व मकर संक्रांति पर 14 जनवरी को बटेश्वर मंदिर के 301 दिन बाद पट खुलेंगे। कोरोना के कारण 19 मार्च से मंदिर के पट बंद थे। इतिहास में पहली बार कोरोना के चलते मंदिर बंद हुआ और बटेश्वर का मेला भी नहीं लगा।
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बटेश्वर के मंदिर पूजा करते श्रद्घालु (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि तीर्थ स्थल ट्रस्ट समिति ने कोरोना की गाइड लाइन का पालन करते हुए ब्रह्मलाल जी महाराज का मंदिर खोले जाने का निर्णय लिया है। 14 जनवरी से भक्त मंदिर में दर्शन पूजन के लिए प्रवेश कर सकेंगे। इस दौरान सैनिटाइजेशन और दो गज दूरी का भक्तों को पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि अभी गर्भ गृह में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। पुजारी ने बताया कि 19 मार्च से बंद पडे़ मंदिरों को खोले जाने की मांग बटेश्वर पहुंचने वाले श्रद्धालु और साधु-संत कई महीने से कर रहे थे। वहीं मंदिर खोले जाने के निर्णय से दुुकानदारों से लेकर साधु संत तक ने खुश जताई है।
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
दिन होगी धुलाई और सैनिटाइजेशन: एसडीएम
एसडीएम बाह अब्दुल बासित ने बताया कि मंगलवार और बुधवार को मंदिर की धुलाई और सफाई कराई जाएगी। उसके बाद सैनिटाइजेशन होगा। 14 जनवरी से कोरोना गाइड लाइन का पालन कर भक्त भोलेनाथ के दर्शन कर सकेंगे।
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बटेश्वर में यमुना घाट पर भक्तों की भीड़ (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
चढ़ाया 51 किलो का घंटा
सोमवार को आगरा से पहुंचे भक्तों ने अपनी मन्नत पूरी होने पर ब्रह्मलाल जी मंदिर में 51 किलोग्राम वजन का पीतल का घंटा चढ़ाया। इन लोगों ने भी मंदिर के पट खुलने की जानकारी पर खुशी जताई।
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बटेश्वर की मंदिर श्रृंखला
- फोटो : अमर उजाला
ये है विशेष
बटेश्वर में यमुना नदी के किनारे 108 मंदिरों की श्रृंखला है, जो अपनी धार्मिक एवं एतिहासिक महत्ता का गुणगान करती है। बटेश्वर मंदिर के घाटों का निर्माण, मंदिरों का जीर्णोद्धार व पार्क आदि विकसित करने के लिए योगी सरकार ने विशेष योजना बनाई है।
बटेश्वर में जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान श्रीनेमिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर शौरीपुर भी स्थापित है। लोगों का कहना है कि बटेश्वर में दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए पर्यटन की दृष्टि से यदि यहां का सर्वांगीण विकास कराया जाए तो धार्मिक श्रद्धालु तथा आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।