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जन्मदिन विशेषः देश का बढ़ाया मान, अटल बिहारी वाजपेयी का घर-आंगन वीरान

Fri, 25 Dec 2020 04:29 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
तेरह दिन, तेरह महीने और फिर पूरे एक कार्यकाल की सरकार चलाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी ने देश का मान बढ़ाया। बटेश्वर के लोगों को उन पर गर्व है लेकिन एक कसक भी है कि बटेश्वर में उनका घर-आंगन वीरान पड़ा है।
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अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव बटेश्वर का रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
अटल बिहारी वाजपेयी ने 1974 में बटेश्वर की बदहाली को उजागर किया। मार्च, 1974 के धर्मयुग के अंक में अटलजी ने बटेश्वर शौरीपुर की बदहाली पर लिखा था कि यहां के कण-कण में इतिहास समाया है, विरासत पर जमी धूल की परत हटाई जानी चाहिए। उनके जाने के बाद बटेश्वर के घाट का विकास तो शुरू हुआ लेकिन बटेश्वर में उनकी स्मृति को सहेजा नहीं गया। उनके घर के खंडहर में बबूल के पेड़ उगे हुए हैं। भतीजे राकेश वाजपेयी, मुकेश वाजपेयी और उनका सानिध्य पाने वाले पूर्व प्रधान चरन सिंह यादव ने बताया कि अटल जी के अस्थि विसर्जन के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बटेश्वर का नक्शा बदलने की बात बोली थी, पर अब तक कुछ नहीं हुआ। 14 करोड़ के प्रस्ताव पर बटेश्वर के लोगों को भरोसा नहीं है।
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बटेश्वर हाल्ट - फोटो : अमर उजाला
मलाल: चाहत रेलवे स्टेशन की, बन सका हाल्ट
6 अप्रैल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी ने बटेश्वर के खॉद पर आगरा इटावा वाया बटेश्वर रेल लाइन की आधारशिला रखी थी। 24 दिसंबर 2015 में तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने बटेश्वर पहुंच कर रेल लाइन का लोकार्पण किया। तब से डेमू पैसेंजर के अलावा एक साप्ताहिक ट्रेन ही इस रूट पर चल रही है। चाहत रेलवे स्टेशन की थी, बन सका हाल्ट। यहां प्लेटफार्म कट गया है, जिसमें गिरकर कई यात्री घायल हो चुके हैं। रोशनी की व्यवस्था नहीं है, पानी के लिए हैंडपंप तक नहीं है।
 

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बटेश्वर में यमुना किनारे स्थित मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मांग: बाह-बटेश्वर को जिला बनाएं
समाजसेवी बाबा हर नारायन यादव ने मांग की है कि अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में बाह-बटेश्वर को जिला बनाया जाए। इसके बाद क्षेत्र का तेज विकास संभव है। बटेश्वर के राम किशन गुप्ता, राम सिंह आजाद, लक्ष्मी नारायन प्रधान, अनिल यादव आदि ने मांग की है कि बटेश्वर में अटल जी के नाम पर रेलवे स्टेशन बने। उनके नाम पर चलने वाली अटल एक्सप्रेस की शुरुआत इसी रूट से हो।
 
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बाह के निवासी - फोटो : अमर उजाला
परिवार की यजमानी थी बटेश्वर में
गांव के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि वाजपेयी परिवार की बटेश्वर में यजमानी थी। बटेश्वर में वाजपेय यज्ञ स्थल पर 400 साल पहले अटल जी के पूर्वज मणिराम वाजपेयी यज्ञ शुरू कराया था। मणिराम वाजपेयी के परिवार में अटल जी 13वीं पीढ़ी के सदस्य थे।        
                                                 
शादी तो मैंने की ही नहीं...
एक बार बटेश्वर आए अटल जी से से उनके बचपन के दोस्तों ने पूछा कि ठंडाई कैसी रहेगी? सादी! हाजिर जवाब अटल जी ने मजाकिया लहजे में कहा था कि शादी तो मैंने की ही नहीं, फिर क्या था? सब ठहाके मार कर हंसे।  - विनोद जैन, बटेश्वर  
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बटेश्वर में यमुना घाट पर अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
अटल की ताजमहल पर कविता
यह ताजमहल, यह ताजमहल। यमुना की रोती धार विकल, कल कल चल चल। जब रोया हिंदुस्तान सकल, तब बन पाया ताजमहल... अटल जी का सानिध्य पाने वाले राम किशन गुप्ता, विनोद जैन ने यह कविता को साझा की।

पसंद थे झरबेरी के बेर और आम 
अटल बिहारी वाजपेयी के बाल सखा कैलाशी ने बताया कि उनको झरबेरी के बेर और आम बहुत पसंद थे। सुबह ही बीहड़ के टीलों पर झरबेरियों को ढूंढकर बेर तोड़ते थे। पुत्तू लाल ने बताया कि स्कूल में उनका भाषण उम्दा होता था।
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