मुगलिया शान-ओ-शौकत बयां करते आगरा किला के मीना बाजार को संवारने की कवायद शुरू की जा रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) मीना बाजार के तीसरे हिस्से का संरक्षण कराने वाला है। यह हिस्सा 1802 से 1984 तक पहले ब्रिटिश सेना और आजादी के बाद भी भारतीय सेना के कब्जे में रहा है। मीना बाजार को मूल रूप में लाने के लिए मूल फर्श तक 5 से 6 फीट तक मिट्टी और मलबा हटाया जाएगा। किवदंतियां हैं कि मुगल शहंशाह जहांगीर ने पहली बार नूरजहां को इसी बाजार में देखा था। और उन्हें प्यार हो गया था।
विज्ञापन
2 of 5
आगरा फोर्ट में मीना बाजार
- फोटो : अमर उजाला
एएसआई अधिकारियों के मुताबिक मीना बाजार में मूल फर्श करीब 5 से 6 फीट नीचे है। लाल पत्थर का फर्श दो ब्लॉक में मिल चुका है। ऐसे में यहां भी मूल फर्श निकालकर किनारे ककैया ईंटों की नालियां निकाली जाएंगी। इस हिस्से में छज्जे टूट चुके हैं, जबकि बाकी दो हिस्सों में आगे छज्जे निकले हुए हैं। वरिष्ठ संरक्षण सहायक अमरनाथ गुप्ता ने बताया कि 50 लाख रुपये की लागत से यहां संरक्षण कार्य होना है।
विज्ञापन
3 of 5
आगरा फोर्ट में मीना बाजार
एएसआई अधिकारियों के मुताबिक ब्रिटिश राज के दौरान मीना बाजार को अस्पताल में बदल दिया गया था। सर्वेंट हॉस्पिटल की पट्टिका अब तक यहां लगी है। यही नहीं, एंबुलेंस खड़ी करने की जगह भी यहां निर्धारित थी। एंबुलेंस से मरीज उतारने में दिक्कत न हो, इसलिए मीना बाजार की दुकानों के आगे मलबा डालकर प्लेटफॉर्म बनाया गया।
4 of 5
आगरा फोर्ट
मीना बाजार का एक हिस्सा सर्वेंट हॉस्पिटल, दूसरा हिस्सा गैरीसन सर्वेंट के लिए बनाया गया था। मीना बाजार के ठीक ऊपर 75 बेड का एक और हॉस्पिटल है, जो जर्जर हो चुका है। ब्रिटिश राज के दौरान मीना बाजार में सीढ़ियों तक को खत्म कर बंद कर दिया गया। कई जगह से दीवार लगाकर मीना बाजार को हॉस्पिटल में बदला गया है।
पूर्व संस्कृति मंत्री जगमोहन के कार्यकाल में आगरा किले के सलीमगढ़, शिवाजी की जेल, रतन सिंह की हवेली और मीना बाजार को पर्यटकों के लिए खोलने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 15 साल में भी यह नहीं हो सका। इनमें केवल मीना बाजार का संरक्षण अधूरा है। दो ब्लॉक का काम पूरा हो चुका है, लेकिन तीसरा ब्लॉक बाकी है। मीना बाजार के तीनों गेटों का संरक्षण एएसआई कर चुका है। इन गेटों के ऊपर सड़क बनी है, जिस पर सेना के भारी वाहन गुजरते थे। इससे गेट दरकने लगे, लेकिन एएसआई की आपत्ति के बाद सेना ने यहां से ट्रक निकालने बंद कर दिए।