आज आपको रूबरू कराते हैं ताजनगरी की उन बेटियों से जिन्होंने समाज के आत्मरक्षा में महारथ हासिल की। सेल्फ डिफेंस में खुद पारंगत होने के साथ दूसरों को भी सिखाया। बाहर के लोगों ने ही नहीं परिवार ने भी रोका लेकिन वह आगे बढ़ती रहीं। पिता-भाई ने विरोध किया लेकिन विश्व रिकार्ड बना दिया। पदक जीतकर जवाब दिया। बेटियों के विश्वास का ही नतीजा रहा कि जो लोग उनका विरोध करते थे वही आज उनकी प्रशंसा कर रहे हैं।
पिता-भाई ने विरोध किया पर रुकी नहीं- अपर्णा राजावत
आगरा के आवास विकास कॉलोनी की सेक्टर-6 की रहने वाली अपर्णा राजावत सेल्फ डिफेंस ट्रेनर हैं। उन्होंने बताया कि मैंने जब फैसला लिया जूडो-कराटे सीखने का तो सभी ने विरोध किया। पापा और भाई को लगा कि मैं सही रास्ते पर नहीं हूं। रिश्तेदार कहते कि यह लड़कियों के वश की बात नहीं। मैंने उन्हें गलत साबित किया। सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग ली।
अपर्णा राजावत ने 1992-93 में नेपाल में हुई साउथ एशिया कराटे चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। 16 बार कराटे और किक बॉक्सिंग में नेशनल चैंपियन रहीं। जब खुद सशक्त हो गईं तो औरों को किया। वो डेढ़ लाख युवतियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। इसी साल 19 फरवरी को एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक साथ 7,400 युवतियों को प्रशिक्षण देकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। उन पर हॉलीवुड में डॉक्यूमेंट्री भी बनी है।
विज्ञापन
3 of 6
सुरभि कुमारी
- फोटो : अमर उजाला
तानों का जवाब मेडल से दिया- सुरभि कुमारी
नगला बूढ़ी निवासी सुरक्षि कुमारी ने कहा कि लड़कियों को सशक्त होना चाहिए। इतना कि दिक्कत आए तो अपनी रक्षा कर सकें। इसके लिए मार्शल आर्ट सीखने की सोची। पहले तो परिवार के लोग मुश्किल से राजी हुए। फिर आसपास के लोगों ने ताने मारे। उनकी परवाह नहीं की। ध्यान जूड़े-कराटे सीखने पर रखा। 2016 में सेकंड कूडो मार्शल आर्ट ओपन डिस्ट्रक्ट चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। फर्स्ट गूजो-रियो कराटे इंटर डिस्ट्रक्ट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। जो ताने मारते थे, कहने लगे कि बेटी तुमने शहर का नाम रोशन किया है। ब्रुसली इंटर डिस्ट्रिक्ट कराटे चैंपियनशिप, आठवीं इंटर स्टेट कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल विजेता बनीं।
4 of 6
चंचल यादव
- फोटो : अमर उजाला
मां ने दिया साथ, आगे बढ़ती गई- चंचल यादव
ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर की कई चैंपियनशिप जीत चुकीं बाईंपुर की रहने वाली चंचल यादव की सफलता का सफर आसान नहीं रहा। खेल के साथ पढ़ाई की चुनौती रही। उन्होंने बताया कि बाहर के लोगों ने पिता को समझाया कि लड़की को खेलने नहीं भेजो। कुछ दिन प्रैक्टिस पर नहीं गई। मेरी निराशा के साथ मेरे लक्ष्य को मां प्रेमलता यादव ने समझा। उन्होंने मुझे प्रेक्टिस करने की अनुमति दी। इसके बाद मेरे जीवन के दो लक्ष्य हो गए। पहला सेल्फ डिफेंस में मेडल हासिल करना और दूसरा लोगों की सोच को बदलना। वर्ष 2017 में थर्ड भगवान महावीर राष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। राष्ट्रीय स्तर की अन्य चैंपियनशिप जीतीं। अब सभी प्रशंसा करते हैं।
विज्ञापन
5 of 6
नैना शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
ताने को चुनौती के रूप में लिया- नैना शर्मा
शीतला गली निवासी नैना शर्मा ने सीबीएसई राष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुकी हैं। वो बताती हैं कि एक रिश्तेदार की बात काफी बुरी लगी। उन्होंने कहा था कि लड़कियों को खेलना नहीं चाहिए, वो आगे नहीं बढ़ सकतीं। मैंने इसे चुनौती के रूप में लिया। ठान लिया कि चाहे कुछ हो जाए, सेल्फ डिफेंस को करियर बनाऊंगी। दो साल तक कड़ी मेहनत की। छह बार मून स्कूल ओलंपिक में पदक प्राप्त किया। तीन बार गोल्ड मेडल, दो बार सिल्वर मेडल और एक बार ब्रॉन्ज मेडल। वर्ष 2018 में लखनऊ में हुई सीबीएसई राष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल प्राप्त किया।
लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं- कोमल वर्मा
छीपीटोला की कोमल वर्मा ने कहा कि इस बात की कभी परवाह नहीं रही कि युवतियों के खेलता देख लोग क्या कहेंगे। सपना था कि साइना नेहवाल, पूनम यादव, दीप्ती शर्मा जैसा बनूंगी। काफी मेहनत की। अंतरराष्ट्रीय शोतोरियो इन्वीटेशनल कराटे चैंपियनशिप में दूसरा स्थान प्राप्त किया। इंटर स्टेट कराटे चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल विजेता बनीं। युवतियों के सिर्फ घर में काम करने वाले लोगों को यह संदेश देना चाहती हूं कि लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं हैं।