आगरा में कड़ाके की ठंड ने लोगों को बेहाल कर दिया है। शीतलहर और गलन के कारण लोगों के हाथ-पैर सुन्न हो रहे हैं। सर्दी के सितम से जीव-जंतु भी बेहाल हैं। शीतलहर से जान बचाने के लिए घड़ियाल चंबल नदी के गहरे पानी के गड्ढों में दुबक गए हैं। वे इन दिनों शिकार करना भी छोड़ देते हैं। सिर्फ सांस लेने के लिए घंटों बाद नदी में पानी की सतह पर आते हैं।
चंबल के घड़ियालों पर अध्ययन कर रहे मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट के जैलाबुद्दीन ने बताया कि ठंड से बचने के लिए आजकल घड़ियाल चंबल नदी के गहराई वाले इलाके में बैठ गए हैं। घड़ियाल का मूवमेंट न होने की वजह से भोजन की जरूरत नहीं होती। बसा पिंडकों में जमा भोजन से जिंदा रहते हैं। उन्होंने बताया कि घड़ियाल कई घंटों तक बिना सांस लिए पानी में रह सकते हैं। यही कारण चंबल नदी की सतह पर घड़ियाल बहुत कम ही आते हैं।