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मरने के बाद भी 'एक साथ' रहेंगे परिवार के सभी सदस्य, ईसाई समाज ने लिया यह फैसला

Thu, 25 Jul 2019 04:42 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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भगवान टॉकिज के पास स्थित क्रिश्चियन कब्रिस्तान। - फोटो : अमर उजाला
ईसाई समाज की संस्था आगरा ज्वाइंट्स सिमेट्रीज कमेटी (एजेएससी) ने फैसला लिया है कि मरने के बाद अब परिवार के सदस्यों को एक ही कब्र में दफनाया जाएगा। इसके लिए कब्र को गहराई तक खोदा जाएगा। एक शव को दफनाने के बाद स्लैब डाला जाएगा। इसी तरह से एक-एक कर अन्य शवों को दफनाया जाएगा। यह फैसला कब्रिस्तानों में पड़ रही जमीन की कमी के कारण लिया गया है। दूसरी वजह मौत के बाद भी परिवार को एक ही जगह रखना बताई जा रही है।
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भगवान टॉकिज के पास स्थित क्रिश्चियन कब्रिस्तान। - फोटो : अमर उजाला
कमेटी के चेयरमैन फादर मून लाजरस, पादरी जिब्राइल दास, पादरी ज्योति सिंह, बिशप पीपी हाबिल, फादर राजन, फादर स्टीफन ने बैठक कर यह फैसला हाल ही में लिया गया है। अब गिरजाघरों में प्रार्थना के लिए आने वाले लोगों को इसके बारे में जानकारी दी जा रही है। इस कमेटी के अंतर्गत गोरों का कब्रिस्तान और तोता का ताल पर बना कब्रिस्तान आता है।
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भगवान टॉकिज के पास स्थित क्रिश्चियन कब्रिस्तान। - फोटो : अमर उजाला
आगरा ज्वाइंट्स सिमेट्रीज कमेटी के चेयरमैन फादर मून लाजरस ने बताया कि हमारा मकसद कब्रिस्तान की जमीन में उन लोगों को सम्मान के साथ स्थान देना है, जो इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। जमीन की कमी के कारण यह फैसला लिया गया है। प्रार्थना सभा में लोगों को इसका महत्व समझाया जा रहा है। समाज के लोगों को समझ भी आ रहा है।

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भगवान टॉकिज के पास स्थित क्रिश्चियन कब्रिस्तान। - फोटो : अमर उजाला
दक्षिण भारत के कई शहरों में एक कब्र में एक परिवार को दफनाने का सिलसिला चल रहा है। एजेसीसी के चेयरमैन मून लाजरस का कहना है कि वहां लोगों को इस बात का भी सुकून है कि जो परिवार जिंदगी भर साथ-साथ रहा, दुनिया छोड़ने के बाद भी वह परिवार एक ही कब्र में हमेशा के लिए सुकून की नींद सो रहा है।
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भगवान टॉकिज के पास स्थित क्रिश्चियन कब्रिस्तान। - फोटो : अमर उजाला
कब्रिस्तानों में कई दशकों पुरानी उन कब्रों को खोला जा रहा है, जिन कब्रों पर दशकों से कोई भी मोमबत्ती जलाने तक नहीं आया है। कमेटी का कहना है कि इस कोशिश से नए शवों को दफनाने के लिए स्थान मिल रहा है। इसके लिए कमेटी पूरी तरह से निगरानी रखती है। कब्र का पूरा ब्योरा मिलने के बाद कब्र की छानबीन करने के बाद ही उसे खोला जाता है। इस तरह जमीन की कमी के कारण शवों को दफनाने में आने वाली दिक्कत को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
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