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प्रदूषण की मार: दो दिन की धूल भरी हवाओं से हांफे फेफड़े, सांस लेने में परेशानी

Wed, 26 May 2021 01:49 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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शहर में छाई धुंध - फोटो : अमर उजाला
आगरा सरिता साहू और मनीष मित्तल की तरह ताजनगरी में कोरोना से ठीक हुए उन लोगों को रविवार और सोमवार को धूल भरी हवाओं और पीएम-2.5 कणों की मात्रा ज्यादा होने से सांस लेने में परेशानी होने लगी, जिनके फेफड़ों को कोरोना ने नुकसान पहुंचाया था। घर के अंदर ही चलने फिरने और सांस लेने में उन्हें परेशानी हुई तो घबराकर चिकित्सक को फोन किए। चिकित्सकों ने प्रदूषण और धूल भरी हवाओं से बचाव की सलाह दी। रविवार से लेकर सोमवार तक आगरा की हवा में सामान्य से 8 गुना ज्यादा जहर घुल गया था। धूल कणों और पर्टिकुलेट मैटर 2.5 कणों की मात्रा खतरनाक स्तर 500 को पार करने से लोगों का सांस लेना कठिन हो गया। दिन में दो बार तक भाप ले रहे लोगों को तीन से चार बार भाप लेनी पड़ी तो नेबुलाइजर का इस्तेमाल भी एक की जगह तीन से चार बार तक करना पड़ा। फिर भी राहत न मिली। घर के अंदर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने के साथ मास्क लगाने के बाद उन्हें कुछ सुकून मिल पाया।
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उड़ रही धूल - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण से 8 मई को ठीक होने के बाद कमला नगर निवासी 46 साल के मनीष मित्तल को रविवार दोपहर से सांस लेने में परेशानी हुई। उन्हें एचआरसीटी रिपोर्ट में फेफड़ों में संक्रमण के जरिए कोरोना का पता चला था। रविवार को धूल भरी हवा के कारण दिनभर गहरी गहरी सांस लेते रहे। चिकित्सक की सलाह पर भाप और नेबुलाइजर का उपयोग सोमवार रात तक किया। मंगलवार को दिक्कत नहीं हुई। 
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प्रदूषण में ताज का हाल - फोटो : अमर उजाला
ट्रांसयमुना कॉलोनी की सरिता साहू को एचआरसीटी में 15 स्कोर निकला था, जो 20 दिनों से घर पर थीं, लेकिन रविवार को उन्हें सांस लेने में भारीपन अनुभव हुआ तो चिकित्सक से बात की। धूल कणों और प्रदूषण के कारण चिकित्सक ने भाप लेने, मास्क पहनने को कहा। घर के अंदर ही चलने पर उन्हें रविवार से परेशानी होने लगी थी, जो मंगलवार को हवा ठीक होते ही खत्म हो गई।

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एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों ने ऐसी ही शिकायतें की, जिनके लिए चिकित्सकों ने भाप लेने और प्रदूषण से बचने को कहा। चिकित्सकों के मुताबिक सामान्य से कई गुना ज्यादा हुए प्रदूषण से इन्फेंक्शन का खतरा है। सामान्य तौर पर एक्यूआई 120 से ज्यादा होने के बाद ही बुजुर्ग और श्वसन रोगियों के लिए सांस लेने में परेशानी होने लगती है। 
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आगरा में प्रदूषण: छाई धुंध - फोटो : अमर उजाला
इस बार कोरोना वायरस ने फेफड़ों को संक्रमित ज्यादा किया है। जो मरीज ठीक हो गए हैं और चल फिर रहे हैं, उनको हवा में मौजूद प्रदूषण से सांस लेने में परेशानी होने के साथ सेकेंडरी इन्फेक्शन का खतरा अधिक है। पोस्ट कोविड मरीजों में ये दिक्कत मिल रही है। ऐसे लोग घरों में भी मास्क पहनें, भाप लें और सुबह योग करें। डॉ जीवी सिंह, चेस्ट फिजिशियन, एसएन मेडिकल कॉलेज

मई में पांच साल, ये रहा हाल
साल                                         एक्यूआई                                   दिन
2021                                            254                                     23 मई
2020                                           169                                      24 मई
2019                                           247                                     15 मई
2018                                           289                                     17 मई
2017                                          233                                      16 मई

मनमानी: तीन अस्पतालों और एक डॉक्टर के खिलाफ अवैध वसूली की शिकायत, टीम करेगी जांच

 
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हाईवे पर छाई धुंध - फोटो : अमर उजाला
दो दिन बाद सुधरी हवा की गुणवत्ता
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी की गई सूची के मुताबिक मंगलवार को आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स 97 पर रहा जो संतोषजनक है। दो दिन बाद आगरा की हवा में सुधार आया है। रविवार को एक्यूआई 254 और सोमवार को 214 पर रहा था जो बेहद खराब स्थिति में था। इन दोनों ही दिन बेहद सूक्ष्म पीएम 2.5 कण 500 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से ज्यादा हो गए थे, जो फेफड़ों के लिए घातक थे। 
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