रावली के उपद्रवियों ने कश्मीर के पत्थरबाजों की याद दिला दी। वहां निशाने पर सेना रहती है, यहां पुलिस थी। वहां मकसद होता है आतंकियों की हिमायत लेकिन यहां तो बगैर किसी वजह केही पुलिस पर हमला किया गया। एक, दो, तीन या चार बार नहीं, सुबह से शाम तक लगातार। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े, रबर की गोलियां चलाई लेकिन पत्थरबाजों पर कोई असर नहीं हुआ। कभी इधर से तो कभी उधर से पत्थर चलते रहे।
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बिखरे पत्थर
- फोटो : अमर उजाला
स्टेट बैंक तिराहा से भी पथराव किया गया। न स्कूल से आते बच्चों पर तरस आया और न ही परीक्षा देने जाती छात्राओं पर। न स्कूल बस को छोड़ा और न ही एंबुलेस को। एसएसपी अमित पाठक, एसपी सिटी कुंवर अनुपम सिंह और एएसपी श्लोक कुमार मोर्चे पर डटे थे लेकिन पत्थरबाजों पर कोई असर ही नहीं था। एसपी पूर्वी, एसपी ट्रैफिक भी डटे रहे लेकिन बवाल नहीं थमा।
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आग
- फोटो : अमर उजाला
पत्थरबाजों में 12 साल के बच्चे, 15-16 के किशोर और 20 से 25 के युवा शामिल थे। छतों से भी पथराव किया जा रहा था। पुलिस के सामने आकर भी पत्थर चलाए जा रहे थे। आगरा। शाम को एक गली में पत्थरबाजों के पत्थर खत्म हो गए। पुलिस आंसू गैस के गोले छोड़ चुकी थी। कुछ देर शांति रही। इसके बाद बोतल बम से हमला किया गया।
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बोतल में पेट्रोल डालकर बम बनाया
- फोटो : अमर उजाला
किसी ने बोतल में पेट्रोल डालकर बम बनाया तो कोई जूते बनाने में काम आने वाला केमिकल बोतल में भर लाया और पुलिस पर फेंक दिया। पुलिस के लिए परेशानी हवा की दिशा से हुई। जिस ओर से पत्थर आ रहे थे, उसी तरफ से हवा की दिशा थी। जैसे ही पुलिस आंसू गैस का गोला छोड़ती, हवा से टीयर गैस पुलिस की ओर आ जाती। पुलिसकर्मियों का हाल बेहाल हो गया, कई के आंसू निकल आए।
रावली में पुलिस ने बड़ी हिम्मत दिखाई। एसएसपी और एसपी सिटी भागते भागते पसीनों से तर-बतर हो गए लेकिन रुके नहीं। 20 पुलिसकर्मी ऐसे रहे जो पथराव में घायल हुए। किसी के कंधे में चोट आई तो किसी के पैर से खून निकल रहा था लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी, पत्थरबाजों का मुकाबला करते रहे।