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घड़ियालों का घर है चंबल नदी: 10 वर्षों में ढाई गुना बढ़ी संख्या, तेजी से बढ़ रहा जलीय जीव का कुनबा

Thu, 23 Dec 2021 02:41 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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चंबल नदी में घड़ियाल के शिशु - फोटो : अमर उजाला
आगरा जनपद के बाह क्षेत्र में बहने वाली चंबल नदी घड़ियालों का घर बन गई है। नदी में घड़ियालों का कुनबा साल दर साल बढ़ रहा है। 10 साल में इनकी संख्या 905 से बढ़कर 2176 हो गई है। जनवरी के पहले सप्ताह तक घड़ियालों का प्रजनन सीजन चलेगा। उसके बाद नेस्टिंग होगी। इसके मद्देनजर वन विभाग ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि घड़ियाल डायनासोर की जलीय प्रजाति है। इनके प्रजनन का मौसम शुरू होने के साथ ही चंबल नदी में इनकी निगरानी बढ़ा दी गई है। घड़ियालों के शोधार्थी जैलाबुद्दीन ने बताया कि चंबल में घड़ियालों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। आगरा के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि डायनासोर प्रजाति के घड़ियालों की चंबल में वंशवृद्धि हो रही है। गणना का काम चल रहा है। 

ऐसे बढ़ा कुनबा
वर्ष-    घड़ियालों की संख्या

2012- 905
2013- 948
2014- 1088
2015- 1151
2016- 1162
2017- 1255
2018- 1681
2019- 1876
2020- 1859
2021- 2176
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चंबल नदी में घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
रेंजर के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में चंबल में घड़ियालों की संख्या लगभग ढाई गुना बढ़ गई है। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के संयुक्त सर्वे के मुताबिक दस साल में 2176 घड़ियाल मिले हैं।
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चंबल नदी किनारे घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
दुनियाभर में घड़ियालों की प्रजाति संकटग्रस्त जीवों की सूची में है। घड़ियालों की 80 फीसदी आबादी चंबल नदी में मौजूद है। चंबल नदी में वर्ष 1979 से घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। हर साल इनकी गणना होती है। 

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चंबल नदी में घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
एशिया की सबसे बड़ी घड़ियाल सेंक्चुरी चंबल है। पहले घड़ियालों के अंडे हैचिंग के लिए कुकरैल प्रजनन केंद्र लखनऊ भेजे जाते थे। अब करीब 10 बरसों से चंबल नदी में भी प्राकृतिक हैचिंग हो रही है। नेस्टिंग और हैचिंग के समय चंबल में वन विभाग की ओर से विशेष निगरानी की जाती है। 
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चंबल नदी में घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2008 में चंबल नदी में एक साथ 100 से ज्यादा घड़ियालों की मौत से प्रोजेक्ट खतरे में पड़ गया था। तब विदेशी विशेषज्ञ बुलाने पडे़ थे। घड़ियालों की मौत की वजह लिवर सिरोसिस बीमारी मानी गई थी। उसके बाद से घड़ियालों का कुनबा साल दर साल बढ़ रहा है।
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