मेरे बाबू तू कहां चला गया...। एक बार मां तो बुला दे। एक बार उठ जा मेरे बाबू। मुझे कोई उससे मिला दो। हादसे की जानकारी पर मृतक प्रमोद मिश्रा की मां अस्पताल पहुंची तो बेटे की लाश देखकर बेसुध हो गई। वह जमीन पर गिर पड़ी। रिश्तेदारों ने उसे संभाला। अस्पताल से बाहर लेकर आए। एक-एक करके अस्पताल में गौरव, ज्योति और साक्षी के परिवारीजन आए तो चीत्कार मच गई। हर तरफ करुण कंद्रन गूंजने लगा।
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रोते-बिलखते परिजनr
- फोटो : अमर उजाला
बोदला निवासी योगेंद्र मिश्रा की शाहगंज-बोदला रोड पर इलेक्ट्रिकल की दुकान है। उनके दो बेटे और दो बेटी थे। बड़ा बेटा प्रशांत दुकान पर बैठता है। प्रमोद भी दुकान पर आता था। वह सिविल डिफेंस का वार्डन था। वह घर से कहकर आया था कि सिविल डिफेंस की मीटिंग में जा रहा है। पड़ोसी अजय वर्मा की आई-20 कार लेकर गया था। पिता को पुलिस का फोन आने पर हादसे का पता चला। प्रमोद सिकंदरा स्थित प्रभा अस्पताल पहुंचे तो कुछ समझ ही नहीं पाए। उन्हें लगा कि बेटे का इलाज चल रहा है। बाद में उन्हें उसकी मौत की जानकारी दी।
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रोते-बिलखते परिजन
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प्रमोद की मां राजरोशन देवी आईं तो बेटे की लाश देखते ही चीखने लगी। उन्हें किसी तरह रिश्तेदारों ने संभाला। प्यार से बेटे को बाबू बुलाती थी। बार-बार बेटे का नाम लेकर पुकार रहीं थीं। यह देखकर हर किसी की आंखों में आंसू आ गए। पिता भी फूट-फूटकर रोने लगे।आवास विकास कालोनी के सेक्टर एक निवासी पप्पू वर्मा सराफ हैं। उनकी घर के नीचे ही दुकान है। दो बेटे थे। इनमें बड़ा गौरव पढ़ता नहीं था। वहीं छोटा बेटा कन्हैया बीटेक कर रहा है।
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घटना की जानकारी पर माता-पिता अस्पताल आए। यहां बेटे की लाश देखकर मां कविता चीखने लगी। बाद में रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। परिवारीजनों ने बताया कि गौरव अक्सर अपनी ननिहाल बड़ौदरा, गुजरात जाता था। उसका लाइसेंस भी वहीं का है। सुबह कहकर गया था कि उसे सिविल डिफेंस का वार्डन बनना है। इसलिए मीटिंग में शामिल होने दोस्त के साथ जा रहा है।
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महर्षिपुरम, सिकंदरा निवासी मूलचंद की भगवान टाकीज चौराहे पर जूस की दुकान है। वह हाल ही में यहां रहने आए थे। इससे पहले विद्या नगर, नगला पदी में रहते थे। उनकी तीन बेटी और दो बेटे थे। उनकी बेटी मृतक साक्षी बीए फाइनल की छात्रा थी। भाई विशाल ने बताया कि बहन ने आगरा कालेज में प्राइवेट फार्म भरा था।
वह घर से कहकर आई थी कि अपनी दोस्त नवी शाह की बोदला निवासी ज्योति पुत्री विजय उपाध्याय से मिलने जा रही है। ज्योति के पिता विजय चौकीदार हैं। घरवालों को जानकारी नहीं थी कि वह किसी के साथ गईं हुई होंगी। पुलिस का फोन आने पर हादसे की जानकारी हुई। इसका पता चलने पर सभी अस्पताल आ गए।