सत्ता, अध्यक्ष और अविश्वास प्रस्ताव। आगरा जिला पंचायत अध्यक्ष पद से इनका अजब संयोग है। पिछले 25 साल से सत्ता दल का प्रत्याशी ही कुर्सी पर काबिज रहा है। सत्ता बदलते ही कुर्सी भी बदल जाती है। अविश्वास प्रस्ताव लाकर चार बार अध्यक्ष बदले जा चुके हैं। पांच साल के कार्यकाल में दो-दो बार अध्यक्ष पद के लिए घमासान हो चुका है। भाजपा से 1995 में चंदन चुन गए। दो साल बाद भाजपा सत्ता में आ गई। 199 तक कल्याण सिंह मुख्यमंत्री रहे। 2000 में सत्ता में भाजपा और प्रेम कुमारी परमार अध्यक्ष चुनी गई। 2005 में मुलायम सिंह मुख्यमंत्रित्व काल में सपा से पहली बार जिले में प्रेमवती सुमन अध्यक्ष बनीं। 2007 में बसपा सत्ता में आई तो 2010 में दौलतराम कुशवाह जिला पंचायत के सभापति चुने गए। दो साल बाद ही सपा की वापसी से फिर अध्यक्ष पद पर सपा काबिज हो गई।