आगरा में बृहस्पतिवार को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दाैरान बड़ा हादसा हो गया था। खेरागढ़ क्षेत्र में उटंगन नदी में 13 लोग डूब गए थे। इनमें से एक को बचा लिया गया था। पांच लोगों को शव मिले थे। सात लोग अब भी लापता हैं। एनडीआरएफ और सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
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उटंगन में चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा में उटंगन नदी में देवी प्रतिमा विसर्जन करने के दाैरान डूबे खेरागढ़ के गांव कुसियापुर के 7 युवकों का तीसरे दिन भी पता नहीं चल सका। शनिवार को भी सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन दल (एनडीआरएफ) का सर्च आपरेशन जारी रहा। युवकों की तलाश के लिए नदी की धारा को डूब क्षेत्र के बीच से नाला बनाकर दूसरी तरफ मोड़ा गया है। 250 मीटर के क्षेत्र में नदी का पानी कम करने के लिए अस्थायी बांध बनाया गया है। नाला बनाकर पानी निकाला गया। उधर अपनों के इंतजार में परिवार के लोगों की आंखें पथरा गई हैं। आंसू भी सूख गए हैं। घटनास्थल पर हजारों लोग डूबे हुए युवकों के निकलने के इंतजार में माैजूद रहे। वहीं, अब तक इस हादसे में एकमात्र जीवित बचे विष्णु ने हादसे की पूरी कहानी बताई।
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ग्रामीणों को समझाते अधिकारी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
2 अक्तूबर को 13 लोग उटंगन में देवी प्रतिमा विसर्जन के दाैरान डूब गए थे। इनमें से एक विष्णु को तत्काल बचा लियाग गया था। दो दिन में पांच गगन, ओमपाल, मनोज, भगवती और अभिषेक के शव निकाले गए थे। वहीं 7 युवक मनोज, सचिन, ओकेश, हरेश, वीनेश, गजेंद्र, दीपक और करन अब भी लापता हैं। घटना के बाद एसडीआरएफ लगी थी। वहीं बृहस्पतिवार को पहले एनडीआरएफ पहुंची थी। दोपहर में सेना की 50 पैरा ब्रिगेड की यूनिट 411 पैरा फील्ड कंपनी पहुंची थी। रात तक तलाश के बाद भी लापता युवक बरामद नहीं हो सके।
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आगरा हादसा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शनिवार सुबह 9 बजे से तीसरे दिन फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू हो गया। अत्याधुनिक उपकरणों के साथ स्कूबा डाइवर ने तलाश करना शुरू कर दिया। बाद में ग्रामीण भी सर्च आपरेशन में शामिल हो गए। पुलिस प्रशासन ने उटंगन के पानी को रोकने के लिए ग्रामीणों की मदद ली। 250 मीटर के क्षेत्र में पानी को रोकने के लिए एक तरफ मिट्टी भरकर प्लास्टिक के कट्टे डाले गए तो दूसरी तरफ नदी के बराबर से बने डूब क्षेत्र में नाला बनाकर पानी को आगे की तरफ निकाला जा रहा है। पानी कम होने पर सर्च आपरेशन में लगी टीमों ने तेज गति से काम किया। हालांकि किसी की रात 8 बजे तक बरामदगी नहीं हो सकी थी।
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नदी में बनाया जा रहा अस्थायी बांध।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घटनास्थल पर दिनभर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा रहा। भयवहा दृश्य को सुनकर हर कोई ब्याकुल हो उठ रहा है। सर्च आपरेशन को देखने के लिए भी 15 से अधिक गांव के लोग पहुंच रहे हैं। सभी को यही आस थी कि कैसे भी करके डूबे हुए लोग मिल जाएं। वहीं डूबे हुए युवकों के परिजन भी बैठे रहे। उन्हें अधिकारी सांत्वना देने में लगे हुए थे।
हादसे की जानकारी देता विष्णु।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दर्दनाक हादसे में अब तक एकमात्र जीवित बचे युवक विष्णु ने घटना का भयावह मंजर बताया। विष्णु ने बताया कि वह और गांव के अन्य युवक माता की मूर्ति लेकर नदी में विसर्जन करने गए थे। पानी कमर तक था और सभी मिलकर मूर्ति को आगे बढ़ा रहे थे। तभी अचानक एक जगह गहरा गड्ढा आ गया और देखते ही देखते सब लोग उसमे समा गए। विष्णु ने किसी तरह उछाल मारी, तभी किनारे पर खड़े गांव के ही रिंकू ने तैर कर उसका हाथ पकड़ लिया और उसे बाहर खींच लाया। विष्णु ने बताया कि इस स्थान पर पहले कभी मूर्ति विसर्जन नहीं किया गया था। उन्हें वहां गहराई का अंदाजा नहीं था। उसने कहा कि नदी के उस हिस्से में मिट्टी का खनन होता रहा है, जिससे कई गहरे गड्ढे बन गए हैं। इन्हीं गड्ढों के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ।