ससुराल का घर पति के नाम है?
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सिर्फ पति के नाम होने से अधिकार खत्म नहीं
कानून के मुताबिक घरेलू रिश्ते में रहने वाली महिला को साझा घर में रहने का अधिकार हो सकता है, भले ही उस घर में उसका अपना कोई मालिकाना हक या नाम न हो। यानी केवल यह कहना कि मकान पति के नाम है, अपने आप पत्नी के रहने के अधिकार को खत्म नहीं करता।
साझा घर किसे माना जाता है?
साझा घर का मतलब केवल ऐसा मकान नहीं है जो पति और पत्नी दोनों के नाम हो। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जिस घर में महिला घरेलू रिश्ते के दौरान रह चुकी है और जहां उसका रहना सिर्फ थोड़े समय के लिए नहीं बल्कि स्थायी घरेलू जीवन का हिस्सा रहा है, वह परिस्थितियों के आधार पर साझा घर हो सकता है। यह घर पति के नाम का हो सकता है या कुछ मामलों में संयुक्त परिवार का घर भी हो सकता है।