How The Fare Of Indian Railways Is Calculated: हम में से कई लोग भारतीय ट्रेनों में सफर करते हैं। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए भारतीय रेलवे देशभर में हजारों ट्रेनों का संचालन कर रहा है। हालांकि, ट्रेन में सफर करने के लिए यात्रियों को टिकट खरीदना जरूरी है। अगर ट्रेन में सफर करते समय आप टिकट नहीं खरीदते हैं। ऐसे में पकड़े जाने पर आप पर जुर्माना लगाया जा सकता है। ट्रेन में अलग अलग क्लास को देखते हुए किराया भी अलग-अलग होता है। वहीं क्या कभी आपने इस बारे में सोचा है कि भारतीय ट्रेनों में किराये को कैसे तय किया जाता है? अगर नहीं, तो आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं। इसके अलावा अलग अलग तरह की ट्रेनों का किराया भी अलग-अलग होता है। उदाहरण के तौर पर शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन का किराया राजधानी या बाकी दूसरी ट्रेनों की तुलना में ज्यादा होता है। ट्रेन के किराये को कैसे तय किया जाता है। इस बारे में बहुत कम लोगों को ही पता है। आइए समझते हैं इस बारे में विस्तार से -
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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेन के किराये को तय करने में सबसे बड़ा फैक्टर किलोमीटर का होता है। दूरी जितनी अधिक होती है किराया भी उतना अधिक होता है।
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दूरी को भी कई कैटेगरी में बांटा गया है। उदाहरण के तौर पर 1-5, 6-10, 11-15, 16-20, 21-25 और 4951-5000 किलोमीटर की कैटेगरी है।
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ऐसे में आप जितनी अधिक दूरी तय करेंगे। उतना ही ज्यादा आपसे किराया वसूला जाएगा। यही नहीं ट्रेनों का किराया ट्रेन में मिलने वाली सुविधाओं के आधार पर भी कम ज्यादा होता है।
इसके अलावा ट्रेन की गति के आधार पर भी किराया कम या ज्यादा होता है। कई ट्रेनों का किराया समय-समय पर बदलता रहता है। हालांकि, ट्रेन का किराया बस, टैक्सी या अन्य निजी वाहनों की तुलना में कम होता है।