रमिता जिंदल
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रमिता पिछले 20 साल में मनु भाकर के बाद किसी मेडल राउंड में पहुंचने वाली दूसरी महिला शूटर बन गईं। रमिता अपने कोच सुमा शिरूर (एथेंस 2004) के बाद ओलंपिक फाइनल में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला राइफल शूटर हैं। रमिता ने 631.5 का स्कोर किया और क्योंकि अंतिम सीरीज तक ऐसा लग रहा था कि वह कट नहीं बना पाएंगी। हालांकि, आखिरी सीरीज में जबरदस्त वापसी से वह शीर्ष-8 में पहुंचने में कामयाब रहीं और फाइनल में पहुंच गईं। एलावेनिल आधे रास्ते तक आगे चल रही थीं, लेकिन अगली यानी आखिरी तीन सीरीज में वह पिछड़ गईं और अंततः क्वालिफाइंग दौर में 10 वें स्थान पर रही। अंतिम सीरीज दोनों भारतीयों के लिए अंतर साबित हुई, क्योंकि दोनों ने मिश्रित टीम स्पर्धा की निराशा को पीछे छोड़ने का लक्ष्य बनाया था। रमित इसमें कामयाब रहीं, लेकिन एलावेनिल ऐसा नहीं कर सकीं।
दक्षिण कोरिया की ह्योजिन बान 634.5 के क्वालिफिकेशन रिकॉर्ड स्कोर के साथ पहले स्थान पर रहीं। नॉर्वे की जेनेट हेग 633.2 के स्कोर के साथ दूसरे और स्विटजरलैंड की ऑड्रे गोगनियाट 632.6 के स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। चीन की यूटिंग हुआंग 632.6 के स्कोर के साथ चौथे स्थान पर रहीं।